! मेरी अभिव्यक्ति !

तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने, दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी . जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

737 Posts

2187 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 12172 postid : 1364094

सच ! तू तो बदल गया .

Posted On 28 Oct, 2017 Social Issues में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Image result for man images
पड़ोस में आंटी की सुबह सुबह चीखने की आवाज़ सुनाई दी ….
”अजी उठो ,क्या हो गया आपको ,अरे कोई तो सुनो ,देखियो क्या हो गया इन्हें …” हालाँकि हमारा घर उनसे कुछ दूर है किन्तु सुबह के समय कोलाहल के कम होने के कारण उनकी आवाज़ साफ़ सुनाई दे रही थी ,मैंने ऊपर से आयी अपनी बहन से कहा कि ”आंटी ज़ोर ज़ोर से चिल्ला रही हैं लगता है कि अंकल को कुछ हो गया है ,वैसे भी वे बीमार रहते हैं ”वह ये सुनकर एकदम भाग ली और उसके साथ मैं भी घर को थोडा सा बंदकर भागी ,वहाँ जाकर देखा तो उनके घर के बराबर में आने वाले एक घर से दो युवक उनकी सहायता के लिए आ गए थे किन्तु अंकल को जब डाक्टर को दिखाया तो वे हार्ट-अटैक के कारण ये दुनिया छोड़ चुके थे किन्तु आंटी के बच्चे दूर बाहर रहते हैं और उनके आने में समय लगता इसलिए उन्हें यही कहा गया कि अंकल बेहोश हैं .उनके पास उनके घर का कोई आ जाये तब तक के लिए मैं भी वहीँ रुक गयी .बात बात में मैंने उनसे पूछा कि आंटी ये सामने वाली आंटी क्या आजकल यहाँ नहीं हैं ?मेरा प्रश्न सुनकर उनकी आँख भर आयी और वे कहने लगी कि यहीं हैं और देखलो आयी नहीं .मैं भी आश्चर्य मैं पड़ गयी कि आखिर कोई इतना मतलबी कैसे हो सकता है ?आंटी जिस तरह से चिल्ला रही थी उससे कोई भी इंसान यहाँ आकर उनकी मदद कर सकता था और उस पर वह, जिसके हाथ टूटने पर कितने ही दिन अपनी बेटी को भेजकर उन्होंने खाना बनवाया था,वह ऐसा करे तो इंसानियत से भरोसा तो उठता ही है .
आज मतलब इतना हावी है कि हर जगह आदमी ये देखकर मदद को आगे बढ़ रहा है कि मेरा यहाँ से क्या मतलब हल हो सकता है यदि कोई मतलब हल होता है तो वह पत्थर भी ढो लेगा और यदि मतलब हल न होता हो तो सुपरिचितों से भी अनजानों जैसा व्यवहार करने में संकोच नहीं करेगा.ऐसा नहीं है कि ये कोई आज की बात है ये पिछले काफी वर्षों से चल रहा है .एक लड़की जो हमसे पिछली कक्षाओं की किताबें ले लेती थी वह जब उसे किताब लेनी होती थी तो जब जब हमारे सामने से गुज़रती चाहे एक दिन में दस बार तो मुस्कुराकर ,सर झुकाकर नमस्ते करती थी और जब किताब ले लेती थी तब सामने से ऐसे निकल जाती थी जैसे हमें जानती ही न हो .
यही नहीं मतलब आदमी को कितना विनम्र बनाता है इसका बहुत सुन्दर उदाहरण ये है कि आपसे ३०-४० साल बड़ा आदमी भी आपको ”बेटी नमस्ते ”कहता है भले ही उसे आपके पिता से काम हो ,
मतलब आज १० -१० साल के बच्चों में नज़र आने लगा है जब उन्हें कुछ चाहिए हो तो मुस्कुराना शुरू और नहीं तो ऐसे देखते हैं जैसे हमने उनका सब कुछ लूट लिया हो .
आज मतलब की इस दुनिया पर बस यही कहा जा सकता है -
”देख तेरे संसार की हालत
क्या हो गयी भगवान,
कितना बदल गया इंसान .”



शालिनी कौशिक
[कौशल ]



Tags:   

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

0 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments


topic of the week



latest from jagran