! मेरी अभिव्यक्ति !

तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने, दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी . जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

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पितृ दिवस की शुभकामनाएं

Posted On: 17 Jun, 2017 Celebrity Writer में

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झुका दूं शीश अपना ये बिना सोचे जिन चरणों में ,

ऐसे पावन चरण मेरे पिता के कहलाते हैं .

…………………………………………………

बेटे-बेटियों में फर्क जो करते यहाँ ,

ऐसे कम अक्लों को वे आईना दिखलाते हैं .

………………………………………………..

शिक्षा दिलाई हमें बढाया साथ दे आगे ,

मुसीबतों से हमें लड़ना सिखलाते हैं .

………………………………………………..

मिथ्या अभिमान से दूर रखकर हमें ,

सादगी सभ्यता का पाठ वे पढ़ाते हैं .

………………………………………………..

कर्मवीरों की महत्ता जग में है चहुँ ओर,

सही काम करने में वे आगे बढ़ाते हैं .

……………………………………………….

जैसे पिता मिले मुझे ऐसे सभी को मिलें ,

अनायास दिल से ये शब्द निकल आते हैं .

………………………………………………

शालिनी कौशिक

[कौशल]



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5 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
June 19, 2017

आदरणीय शालिनी  जी ,बहुत सुन्दर अहसास किन्तु अजीब लगता है जब कोई फादर्स डे को पित्र दिवस कहता है | पित्र दिवस से पित्र पक्ष की याद आ जाती है | जब अपने पितरों का स्मरण किया जाता है | जो नहीं रहे | जबकि फादर्स डे में हम अपने जीवित पापा को विश करते हंसते खेलते हैं और आनंदित होते हैं | मेरे विचार से फादर्स डे को फादर्स डे ही माना जाये ना की पित्र दिवस | बाकी अहसास तो अलग अलग हैं |यहाँ फादर्स डे का हिन्दी अनुवाद भाव बदल देता है | क्षमा प्रार्थी हूँ जो अपने अहसास थोप रहा हूँ ओम शान्ती शान्ती

    June 20, 2017

    अपनी अपनी संसकृति की बात है महोदय, हमें भी फादर में चरच के दर्शन होते हैं. ॐ श्री हरि

Shobha के द्वारा
June 18, 2017

प्रिय शालनी जी आपकी कविता के बाद आँखों से कितना पानी बहा है आप सोच नहीं सकती मेरी थीसिस पूरी हुई पिता चले गए अभी वह रिटायर नहीं हुए थे पिता को खोना सहन नहीं होता हम सब भाई बहन इकठ्ठा होते हैं एक ही बात करते हैं मेरे पिताजी जैसे पिता मिले मुझे ऐसे सभी को मिलें , अनायास दिल से ये शब्द निकल आते हैं .

Shobha के द्वारा
June 18, 2017

प्रिय शालिनी आज जो भी हूँ अपने स्वर्गीय पिता की बदौलत हूँ अति सुंदर झुका दूं शीश अपना ये बिना सोचे जिन चरणों में , ऐसे पावन चरण मेरे पिता के कहलाते हैं .


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