! मेरी अभिव्यक्ति !

तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने, दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी . जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

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#जागो रे आम आदमी

Posted On: 31 Mar, 2017 Celebrity Writer में

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#जागो रे अाम आदमी किसी शायर ने कहा है -

”कौन कहता है आसमाँ में सुराख़ हो नहीं सकता ,
एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों .”

भारतवर्ष सर्वदा से ऐसी क्रांतियों की भूमि रहा है जिन्होंने हमेशा ”असतो मा सद्गमय ,तमसो मा ज्योतिर्गमय ,मृत्योर्मामृतं गमय”का ही सन्देश दिया है और क्रांति कभी स्वयं नहीं होती सदैव क्रांति का कारक भले ही कोई रहे पर दूत हमेशा आम आदमी ही होता है क्योंकि जिस तरह से लावा ज्वालामुखी के फटने पर ही उत्पन्न होता है वैसे ही क्रांति का श्रीगणेश भी आम आदमी के ह्रदय में उबलते क्रोध के फटने से ही होता है .

डेढ़ सौ वर्षों की गुलामी हमारे भारतवर्ष ने झेली और अंग्रेजों के अत्याचारों को सहा किन्तु अंग्रेजों को हमारे क्रांतिकारियों के सामने हमेशा मुंह की खानी पड़ी .हमारे देश के महान क्रन्तिकारी चंद्रशेखर आजाद को गिरफ्तार करने के बावजूद वे उन्हें तोड़ नहीं पाये .उनकी वीरता अंग्रेजों के सामने भी अपने मुखर अंदाज में थी -

”पूछा उसने क्या नाम बता -आजाद ,
पिता को क्या कहते -स्वाधीन,
पिता का नाम -
और बोलो किस घर में हो रहते ?
कहते हैं जेलखाना जिसको वीरों का घर है ,
हम उसमे रहने वाले हैं ,उद्देश्य मुक्ति का संघर्ष है .”

साइमन कमीशन का भारत की जनता ने कड़ा विरोध किया और अंग्रेजों की लाठियों की मार को भी झेला-

”लाठियां पड़ी गिर पड़े जवाहर लाल वहां ,
औ पंत गिरे थे ऊपर उन्हें बचाने को .”

ये एक आम आदमी की ही ताकत थी जिसने ब्रिटिश हुकूमत को खौफ से भर दिया था .अल्फ्रेड पार्क में स्वयं की गोली से शहीद हो चुके चंद्रशेखर आजाद के मृत शरीर के पास तक जाने की हिम्मत ब्रिटिश पुलिस में नहीं थी ,कई गोलियां उनके मृत शरीर पर बरसाकर ही वह आगे बढ़ने का साहस कर पायी थी .

सत्य व अहिंसा के दम पर अंग्रेजों के दांत खट्टे करने वाले महात्मा गांधी को तो ब्रिटिश हुकूमत कभी भुला ही नहीं पायेगी जिन्होंने बिना किसी हथियार के हथियारों से लैस फिरंगियों को भारत छोड़ने पर विवश कर दिया -

”धरती पे लड़ी तूने अजब ढब की लड़ाई ,
दागी न कहीं तोप न बन्दूक चलाई ,
दुश्मन के किले पर भी न की तूने चढ़ाई
वाह रे फ़कीर खूब करामात दिखाई .
चुटकी में दुश्मनों को दिया देश से निकाल.
….दुनिया में तू बेजोड़ था इंसान बेमिसाल .”
…जिस दिन तेरी चिता जली रोया था महाकाल .
साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल.”
. स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात भारत एक ”सम्पूर्ण प्रभुत्व संपन्न लोकतंत्रात्मक गणराज्य” बना .यहाँ राजशाही ख़त्म हुई जनता का शासन आरम्भ हुआ और आम आदमी की ताकत पर यह लोकतंत्र विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र बना .

२०१२ आम आदमी की ताकत के हिसाब से अगर देखा जाये तो अति महत्वपूर्ण वर्ष कहा जायेगा .जहाँ आज तक बलात्कार पीड़िता को स्वयं जनता ही अपराधी का दर्जा देती थी वही दामिनी गैंगरेप कांड में दामिनी के साथ खड़ी हो गयी .पूरा देश एक स्वर में दामिनी के लिए न्याय मांग रहा था और मांग रहा था उसके लिए जीवन की दुआएं .अभूतपूर्व दृश्य उपस्थित था, कड़ाके की ठण्ड के बावजूद जनता आंदोलन रत थी और सारे देश में जैसे किसी को अन्य कोई समस्या रह ही नहीं गयी थी ,रह गयी थी तो केवल दामिनी की चिंता और उसके अपराधियों के लिए फांसी की सजा की मांग ,सरकार हिल गयी थी जनता के वे तेवर देखकर और समझ में आ गया था कि जनता को यूँ ही जनार्दन नहीं कहा जाता .

उसके बाद आम आदमी की ताकत दिखाई प्रसिद्द समाजसेवी अन्ना हज़ारे ने जिन्होंने सरकार को ही अल्टीमेटम दे दिया लोकपाल के लिए और यह जनता की ही ताकत है जो लोकपाल पास हुआ है .
है .

आरोप-प्रत्यारोप आम आदमी करता है किन्तु सर्वजन हिताय व् सर्वजन सुखाय के लिए और जब वह अपनी ताकत से उस स्थिति में आता है तब काम करता है और यह साबित करता है कि ऐसा कुछ नहीं जो आम आदमी के हाथ में न हो ,उसके हाथ में सब कुछ है बस उसे उस दिशा में सोचना भर होता है क्योंकि -

”आदमी सोच तो ले उसका इरादा क्या है ..”

आज आम आदमी न केवल परिवर्तन ला सकता है बल्कि ला रहा है .ये आम आदमी के दिमाग की ही ताकत है जो अग्नि-५ बना और उसने चीन के दिल में भारत के लिए दहशत भर दी,ये आम आदमी की ही सामूहिक शक्ति है जो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को कारगिल के बाद भारत आने को मजबूर कर पायी ,ये आम आदमी की ताकत है जो उसे सूचना का अधिकार दिलाती है जिससे सरकारी तंत्रो में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर करने में उसे मदद मिलती है ,ये आम आदमी की ताकत है जो माँ को पिता के साथ संतान के शैक्षिक अभिलेखों में स्थान दिलाती है और ये भी आम आदमी की ही ताकत है जो बार-बार गिरने के बावजूद ,विध्वंस के बावजूद इस देश को खड़ा करती है और आम आदमी की इसी ताकत को इस देश ने माना है और उसे महत्व दिया है .आम आदमी यहाँ अपनी ताकत को विश्व में एक आदर्श रूप में प्रस्तुत करता है और उसे नतमस्तक होने को मजबूर करता है .आम आदमी की इसी ताकत को शकील”ज़मील” ने यूँ व्यक्त किया है -

”जो बढ़के सीना-ए-तूफ़ान पे वार करता है ,
खुदा उसी के सफीने को पार करता है .”

शालिनी कौशिक
[कौशल ]



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