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राष्ट्रीय पुरस्कार :ड्रेस कोड बनाना ही होगा .

Posted On 8 May, 2016 में

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शालीनता भारतीय नारी का सर्वश्रेष्ठ आभूषण रहा है और आजतक भारतीय नारी इस आभूषण को अपने वस्त्रों के चयन के माध्यम द्वारा पूरी दुनिया के समक्ष रख एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत  करती  रही है .देश के बहुत से समारोहों में इस परंपरा का पालन किया जाता रहा है विशेषकर राष्ट्रपति जी द्वारा प्रदत्त पुरस्कारों के अवसर पर .भले ही राष्ट्रपति स्वयं महिला हों वे भी इसी परंपरा को निभाने में ही स्वयं को गौरवान्वित महसूस करती रही हैं -

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भले ही खेल के मैदान में स्कर्ट पहनने के कारण विवादों से घिरी रही हो लेकिन राष्ट्रपति जी से पुरस्कार लेते समय अपने देश की परंपरा निभाना नहीं  भूलती

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खिलाडी वर्ग खेल के वक़्त बहुत सी ऐसी वेशभूषा धारण करती हैं जो हमारे देश की संस्कृति के अनुरूप नहीं हैं किन्तु वे वेशभूषाएं खेल के लिए ज़रूरी है तब भी वे पुरस्कार लेते वक़्त एक शालीन वेशभूषा में राष्ट्रपति जी से पुरस्कार लेने के लिए उपस्थित होती हैं -

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ऐसे ही फिल्मों में दृश्य की मांग पर अभिनेत्रियों को बहुत कुछ ऐसा पहनने की छूट मिली हुई है जो भारतीय संस्कृति के अनुरूप नहीं है लेकिन वहां ये छूट उन्हें देनी पड़ती है किन्तु धीरे धीरे इस छूट का वे नाजायज फायदा उठाने में लगी हैं पहले जहाँ अभिनेत्रियां राष्ट्रीय पुरस्कार में शालीनता से उपस्थित होती थी -

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उसे अब पुरस्कार लेने आने वाली अभिनेत्री कंगना द्वारा पूरी तरह से तोड़ दिया गया -
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जिसे देखते हुए ये कहा जा सकता है कि आगे ऐसी धृष्टता न हो इसके लिए इस सम्बन्ध में ड्रेस कोड बनाना आवश्यक होना चाहिए .वर्ना एक पुराना फ़िल्मी गाना यहाँ तो पूरी तरह से फिट बैठ ही जायेगा और भारतीय संस्कृति का पूरी तरह से हो जायेगा बेडा गर्क -
”पहले तो था चोला बुरका ,
फिर कट-कटकर वो हुआ कुर्ता ,
चोले की अब चोली है हुई ,
चोली के आगे क्या होगा ?
ये प्रश्न तो हम सबको अब विचारना ही होगा .
शालिनी कौशिक
[कौशल ]


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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Rajeev Varshney के द्वारा
May 9, 2016

बहन शालिनी नारी की गरिमा का आपने बिलकुल सही चित्रण किया है. कंगना एक अच्छी अभिनेत्री है किन्तु भारत के रष्ट्रपति के सम्मुख उन्होंने जो वस्त्र धारण किये वे भारतीय नारी की गरिमा को गिराने वाले और फूहड़ थे. इस बात का अहसास कंगना को करना भी जरुरी है. सादर राजीव वार्ष्णेय

Shobha के द्वारा
May 9, 2016

प्रिय शालनी जी काफी समय बाद आपको ब्लॉग पर देखा वह भी भारतीय संस्कृति के विषय को उठाते हुए राष्ट्रपति जी से पुरूस्कार लेते समय कंगना को भारतीय प्रधान में आना चाहिए था इस तरह फ़िल्मी तरिके से आना अच्छा नहीं लगा


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