! मेरी अभिव्यक्ति !

तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने, दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी . जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

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तलवार अपने हाथों से माया को सौंपिये.

Posted On: 28 Feb, 2016 में

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बेबाक बोलना हो बेबाक बोलिये,
पर बोलने से पहले अल्फाज तोलिये.
……………………………………………..
दावा-ए-सर कलम का करना है बहुत आसां,
अब हारने पर अपने न कौल तोडिये.
……………………………………………….
बारगाह में हो खडे बन सदर लेना तान,
इन ताना-रीरी बातों की न मौज लीजिए.
………………………………………………….
पाकीजा खयालात अगर जनता के लिये हैं,
मांगने से पहले हक उनका दीजिए.
………………………………………………
सच्चाई दिखानी है माया को स्मृति,
अपने कहे हुए से पीछे न लौटिये.
………………………………………..
मुश्किल अगर हो काटना, अपने ही हाथों सिर,
तलवार अपने हाथों से माया को सौंपिये.
…………………………………………………….
अब सर-कलम न मुद्दा रह गया स्मृति,
सरकार की इज्जत की ना नीलामी बोलिये.
………………………………………………………..
ये “शालिनी” दे रही है, खुल तुमको चुनौती,
कानून के मजाक की ना राह खोलिये.
…………………………………………………..
शालिनी कौशिक
कौशल



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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Jitendra Mathur के द्वारा
March 2, 2016

वाह शालिनी जी ! क्या कहने हैं आपकी कलम के ! किसी भी तलवार से ज़्यादा पैनी तो यही है ।

Jitendra Mathur के द्वारा
March 2, 2016

वाह शालिनी जी ! क्या कहने हैं आपके कलम के ! किसी भी तलवार से ज़्यादा पैनी तो यही है ।


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