! मेरी अभिव्यक्ति !

तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने, दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी . जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

702 Posts

2169 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 12172 postid : 1141028

ये था सरकारी मंसूबा - जाट आरक्षण

  • SocialTwist Tell-a-Friend

जाट आरक्षण पर राज्य और केन्द्र में बुरी तरह फंसी भाजपा

देश एकबार फिर आरक्षण की आग में झुलस रहा है और इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है. हरियाणा सरकार आंदोलनकारियों की मांग मानने को राजी हो गई है और ये सब तब जब लोगों की दुकानों में आग लगा दी गई, बाजार लूट लिए गए, बसों, ट्रेनों को नुकसान पहुंचाया गया, मतलब क्या निकला यही ना कि इस देश मे अगर किसी को अपनी बात मनवानी है तो उसे जनजीवन को अस्त-व्यस्त करना होगा, तोड़फोड़ करनी होगी, सरकारी प्रतिष्ठानों में आग लगानी होगी. मात्र दो दिन में जाटों ने देश हिला दिया जबकि ये केवल एक राज्य में आरक्षण मांगने चले थे लेकिन अपना हित साधने में सफल रहे और इस तरह एक संदेश सारे देश के बरसों से जुटे आंदोलनकारियों को दे गये विशेष रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाइकोर्ट खंडपीठ की मांग में लगे वकीलों के समुदाय को. और संदेश यह है -
“खुदी को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले ,
खुदा बंदे से खुद पूछे बता तेरी रजा क्या है.”
इसलिए सरकार का इनके प्रति सही कदम न उठाते हुए इनकी नाजायज मांगों को स्वीकार करना देश में अराजकता को फैलाने में सहयोग करना ही कहा जाएगा क्योंकि सेना को भी वहां कार्यवाही करने को तब मुक्त किया गया जब जनजीवन लुटपिट चुका या यूँ कहें तो ज्यादा सही होगा कि सरकार को अपने मंसूबे को पूरा करने का उपयुक्त माहौल मिल चुका.
शालिनी कौशिक
[ कौशल ]



Tags:

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

1 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Jitendra Mathur के द्वारा
March 1, 2016

कभी मण्डल कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर दिए गए आरक्षण के विरोध में हुए आंदोलन का अगुआ बनने वाला जाट समुदाय आज अन्य समुदायों की दृष्टि में अपना सम्मान खो चुका है । हरियाणा में अन्य समुदायों ने उसका बहिष्कार कर दिया है । सरकार को अगर ब्लैकमेल के आगे घुटने ही टेकने थे तो पहले दिन ही टेक सकती थी । सरकार जनता की सुरक्षा में पूरी तरह विफल रही है और जाटों को अब आरक्षण देने से सारे देश के सामने एक अनुचित उदाहरण सदा के लिए उपस्थित हो जाएगा कि हिंसा और गुंडागर्दी से किसी भी सरकार को झुकाया जा सकता है और अपनी अनुचित माँगें मनवाई जा सकती हैं ।


topic of the week



latest from jagran