! मेरी अभिव्यक्ति !

तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने, दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी . जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

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यही कामना हों प्रफुल्लित आओ मनाएं हर क्षण को .-२०१६ शुभ हो

Posted On: 31 Dec, 2015 कविता,Celebrity Writer,Special Days में

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अमरावती सी अर्णवनेमी पुलकित करती है मन मन को ,
अरुणाभ रवि उदित हुए हैं खड़े सभी हैं हम वंदन को .

……………………………………………………


अलबेली ये शीत लहर है संग तुहिन को लेकर  आये  ,
घिर घिर कर अर्नोद छा रहे कंपित करने सबके तन को .

…………………………………………………………………


मिलजुल कर जब किया अलाव  गर्मी आई अर्दली बन ,
अलका बनकर ये शीतलता  छेड़े जाकर कोमल तृण को .

…………………………………………………………


आकंपित हुआ है जीवन फिर भी आतुर उत्सव को ,
यही कामना हों प्रफुल्लित आओ मनाएं हर क्षण को

…………………………………………………………………………………………………….


पायें उन्नति हर पग चलकर खुशियाँ मिलें झोली भरकर ,
शुभकामना देती ”शालिनी”मंगलकारी हो जन जन को .

…………………………………………………..
शालिनी कौशिक
[कौशल]


शब्दार्थ :अमरावती -स्वर्ग ,इन्द्रनगरी ,अरुणिमा -लालिमा ,अरुणोदय-उषाकाल ,अर्दली -चपरासी ,अर्नोद -बादल ,तुहिन -हिम ,बर्फ ,अर्नवनेमी -पृथ्वी



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Jitendra Mathur के द्वारा
March 1, 2016

बहुत सुंदर कविता शालिनी जी । अभिनंदन ।

sadguruji के द्वारा
January 4, 2016

आदरणीया शालिनी कौशिक जी ! बहुत सुन्दर और भावपूर्ण शुभकामना सन्देश ! नववर्ष की आपको हार्दिक बधाई !


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