! मेरी अभिव्यक्ति !

तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने, दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी . जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

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हिम्मतें दुश्वारियों में दोस्त बन जाएँगी .

Posted On: 25 Nov, 2015 कविता,Celebrity Writer,Others में

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ज़िंदगी की मुश्किलें हर रोज़ आज़माएंगी ,
डरते-डरते गर जियेगा यूँ ही ज़ान जाएगी .
…………………………………………………………
इस जहाँ में कोई तेरा साथ देगा ही नहीं ,
यूँ डरेगा ,परछाई भी साथ छोड़ जाएगी .
……………………………………………………..
आये हैं तन्हा सभी जायेंगे तन्हा सभी ,
न समझ इस बार दुनिया तेरे साथ जाएगी .
……………………………………………………..
गम नहीं अपने मुकाबिल दुश्मनों को देख ले ,
मंज़िलें यूँ हर कदम पर नित नयी मिल जाएँगी .
………………………………………………………..
झेलकर हर बदजुबानी समझा रही ”शालिनी ”,
हिम्मतें दुश्वारियों में दोस्त बन जाएँगी .
……………………………………………..
शालिनी कौशिक
[कौशल ]



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Jitendra Mathur के द्वारा
March 1, 2016

यह कविता आपके ब्लॉग के कैप्शन - ’तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने, दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी; जो आज न पहचान सकें तेरी काबिलियत, कल उनकी पीढ़ियाँ तक इस्तकबाल करेंगी’ का ही विस्तृत रूप है । बहुत-बहुत आभार शलिनी जी इस ओजस्वी एवं प्रेरणादायक रचना के लिए ।

OM DIKSHIT के द्वारा
November 25, 2015

शालिनी जी ,नमस्कार. ओजस्वी विचार -युक्त पंक्तियाँ.सुन्दर.


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