! मेरी अभिव्यक्ति !

तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने, दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी . जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

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बेटी के आंसू बहने से ,माँ रोक सकी है कभी नहीं .

Posted On: 14 Oct, 2015 social issues,कविता,Celebrity Writer में

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बेटी मेरी तेरी दुश्मन ,तेरी माँ है कभी नहीं ,

तुझको खो दूँ ऐसी इच्छा ,मेरी न है कभी नहीं .

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नौ महीने कोख में रखा ,सपने देखे रोज़ नए ,

तुझको लेकर मेरे मन में ,भेद नहीं है कभी नहीं .

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माँ बनने पर पूर्ण शख्सियत ,होती है हर नारी की ,

बेटे या बेटी को लेकर ,पैदा प्रश्न है कभी नहीं .

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माँ के मन की कोमलता ही ,बेटी से उसको जोड़े ,

नन्ही-नन्ही अठखेली से ,मुहं मोड़ा है कभी नहीं .

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सबकी नफरत झेल के बेटी ,लड़ने को तैयार हूँ,

पर सब खो देने का साहस ,मुझमे न है कभी नहीं .

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कुल का दीप जलाने को ,बेटा ही सबकी चाहत ,

बड़े-बुज़ुर्गों  की आँखों का ,तू तारा है कभी नहीं .

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बेटे का ब्याह रचाने को ,बहु चाहिए सबको ही ,

बेटी होने पर ब्याहने का ,इनमे साहस है कभी नहीं .

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अपने जीवन ,घर की खातिर ,पाप कर रही आज यही ,

माफ़ न करना अपनी माँ को ,आना गर्भ में कभी नहीं .

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रो-रोकर माँ कहे ”शालिनी ”वसुंधरा भी सदा दुखी ,

बेटी के आंसू बहने से ,माँ रोक सकी है कभी नहीं .

…………………………………………………………………..

शालिनी कौशिक

[कौशल ]



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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
October 16, 2015

माँ -बेटी के भावनात्मक रिश्ते को शब्दों में पिरोया है शालिनी जी ,ह्रदय स्पर्शी कविता ,सादर .(आपकी पोस्ट पर कॉमेंट नहीं जाते हैं )


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