! मेरी अभिव्यक्ति !

तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने, दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी . जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

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आखिर प्रधानमंत्री ने स्वीकारी नेहरू-गांधी परिवार की श्रेष्ठता

Posted On: 18 Jul, 2015 Others में

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आज एकाएक एक शेर याद आ गया .कुछ यूँ थी उस शेर की पंक्तियाँ -
”कैंची से चिरागों की लौ काटने वालों ,
सूरज की तपिश को रोक नहीं सकते .
तुम फूल को चुटकी से मसल सकते हो लेकिन
फूल की खुशबू को समेट नहीं सकते .”
सियासत आदमी से जो न कहलवादे मतलब सब कुछ कहलवा सकती है सही शब्दों में कहूँ तो उगलवा सकती है और ऐसा ही हो गया जब प्रधानमंत्री मोदी ने जम्मू में जाने माने कॉंग्रेसी दिग्गज गिरधारी लाल डोगरा के जन्म शताब्दी समारोह में गिरधारी जी के २६ बार बजट पेश करने पर अपने विचार प्रस्तुत करते वक्त अपने मुख कमल से जो उद्गार व्यक्त किये वे उनके न चाहते हुए भी उस सच्चाई को सबके सामने ला रहे थे जिससे भाजपाई और स्वयं प्रधानमंत्री भी आज तक बचते आ रहे थे , वे विचार कुछ यूँ थे -
”यह तभी संभव होता है जब आपकी व्यापक स्वीकार्यता हो .”
और ये वे शब्द हैं जिससे आने वाले वक्त में कॉंग्रेसियों को स्वयं के हाईकमान को लेकर एक बार फिर गर्व करने का अवसर मिल गया क्योंकि सभी जानते हैं कि नेहरू गांधी परिवार ही देश पर शासन सत्ता को सबसे लम्बे समय तक सँभालने वाला परिवार है और आज उस पर उनके धुर विरोधी भाजपाई प्रधानमंत्री मोदी की मुहर भी लग गयी भले ही वे सीधे न स्वीकारें पर अप्रत्यक्ष रूप से सच्चाई वे जानते हैं यह आज साबित हो ही गया .
शालिनी कौशिक
[कौशल ]

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5 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Santlal Karun के द्वारा
July 23, 2015

आदरणीया शालिनी जी, निश्चित ही नेहरू-मोदी देश की महान हस्तियाँ हैं, किन्तु देश के नागरिकों की सम्यक दृष्टि में देश सर्वोपरि होना चाहिए  | कदाचित इसी दृष्टि-अभाव के कारण हम दल-दल में फँसे पड़े है | राजनीति की जैसी राजनीतिक-राजनैतिक स्वच्छता, संयोग-सहयोग देश को मिलना चाहिए वह देश के नागरिक नहीं ले पा रे हैं, क्योंकि हम व्यकित और व्यकितगत आस्थाओं के शिकार हो रहे हैं | अब नितांत वक्तिगत राय और नेताओं के व्यक्तित्व एवं कृतित्व की सीमाओं से ऊपर उठकर भारत की महानता की श्रीवृद्धि के लिए ध्यान केन्द्रित करना नागरिकों के लिए अधिक श्रेयस्कर है | हाँ, यदि किसी को नेताओं में शुमार होना है, तो बात अलग है | पर उसके लिए भी व्यक्तिवाद नहीं, राष्ट्रवाद के लक्ष्य की राजनीति उसे श्रेष्ठतर नेतृत्वकर्ता सिद्ध कर सकती है, जिसकी आज बड़ी आवश्यकता है | …सादर !

Santlal Karun के द्वारा
July 23, 2015

आदरणीया शालिनी जी, निश्चित ही नेहरू-मोदी देश की महान हस्तियाँ हैं, किन्तु देश के नागरिकों की सम्यक दृष्टि में देश सर्वोपरि होना चाहिए  | कदाचित इसी दृष्टि-अभाव के कारण हम दल-दल में फँसे पड़े है | राजनीति की जैसी राजनीतिक-राजनैतिक स्वच्छता, संयोग-सहयोग देश को मिलना चाहिए वह देश के नागरिक नहीं ले पा रे हैं, क्योंकि हम व्यकित और व्यकितगत आस्थाओं के शिकार हो रहे हैं | अब नितांत वक्तिगत राय और नेताओं के व्यक्तित्व एवं कृतित्व की सीमाओं से ऊपर उठकर भारत की महानता की श्रीवृद्धि के लिए ध्यान केन्द्रित करना नागरिकों के लिए अधिक श्रेयस्कर है | हाँ, यदि किसी को नेताओं में शुमार होना है, तो बात अलग है | पर उसके लिए भी व्यक्तिवाद नहीं, राष्ट्रवाद के लक्ष्य की राजनीति उसे श्रेष्ठतर नेतृत्वकर्ता सिद्ध कर सकती है, जिसकी आज बड़ी आवश्यकता है |

Shobha के द्वारा
July 23, 2015

प्रिय शालनी जी कांग्रेस के एक प्रधानमन्त्री नरसिंहा राव भी थे उनके नेत्रत्व में वित्त मंत्री मनमोहन सिंह जी ने आर्थिक सुधारों द्वारा देश को नई दिशा दी थी

rajanidurgesh के द्वारा
July 23, 2015

शालिनीजी वाह ! क्या खूब लिखा है.

brijeshprasad के द्वारा
July 19, 2015

शालनी जी, सा आदर प्रणाम। आप की पूरी आस्था कांग्रेस में नहीं, अपितु नेहरू गांधी परिवार में है,ऐसा मुझे लगता है।मोदी जी व्यक्तब्य से आप अपने को विजयी सा महसूस कर रही है। कोई भी नेहरू एवं गांधी परिवार को देश की उपलब्धियों से अलग नहीं कर नहीं देख सकता। आखिर दशकों तक इस परिपावर ने देश पर एकछत्र राज्य किया है। एक प्रश्न मुझे कुरेदता है आखिर – अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर गांधी परिवार ने कार्यक्रम का बहिष्कार कर, विदेश प्रवास कर 192 देशो को क्या सन्देश दिया।


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