! मेरी अभिव्यक्ति !

तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने, दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी . जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

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क्या करेगी जन्म ले बेटी .....

Posted On: 10 Jun, 2015 social issues,कविता,Celebrity Writer में

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क्या करेगी जन्म ले बेटी यहाँ
साँस लेने के काबिल फिजा नहीं ,
इस अँधेरे को जो दूर कर सके
ऐसा एक भी रोशन दिया नहीं !
……………………………………………………
क्या करेगी तरक्की की सोचकर
तेरे लिए ये जहाँ बना नहीं ,
हौसलों को तेरे जो पर दे सके
ऐसा दिलचला कोई मिला नहीं !
………………………………………………..
क्या करेगी सोच साथ देने की
तेरी नहीं कोई ज़रुरत यहाँ ,
कद्र जो तेरी मदद की कर सके
ऐसा कदरदान है हुआ नहीं  !
………………………………………………….
क्या करेगी उनके ग़मों को बांटकर
तुझसे साझा उन्होंने किये नहीं ,
सह रही जो सदियों से तू आज तक
उनका साझीदार है यहाँ नहीं  !
……………………………………………….
”शालिनी”ही क्या अनेकों बेटियां
बख्तरों में बंद हो आई यहाँ ,
मुजरिमों की जिंदगी क्यूं है मिली
इसका खुलासा कभी किया नहीं !
………………………………………….
शब्दार्थ -दिलचला-दिलेर ,साहसी .बख्तर-लोहे का कवच .
शालिनी कौशिक
[कौशल ]



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5 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yamunapathak के द्वारा
June 14, 2015

शालिनी जी एक सुन्दर भावाभिव्यक्ति है यहकविता उन कई लड़कियों की विवशता बयान कर रही है सपने देखे पर वे पूरे न हुए पर प्रयास करना ज़रूरी है.समाज के सामने अपनी प्रतिबद्धता साबित करना ज़रूरी है साभार

Bhola nath Pal के द्वारा
June 12, 2015

शालिनी जी ! यथार्थ चित्रण i धन्यवाद ………

Shobha के द्वारा
June 11, 2015

प्रिय शालिनी आज बेटी ही माँ बाप का ड़याँ रखती है बेटे अपना अलग घर बसा लेते हैं इस सत्य को धीरे- धीरे माँ बाप समझने लगे हैं

Maharathi के द्वारा
June 10, 2015

शालिनी कौशिकजी एडवोकेट।। सादर प्रणाम।। ‘क्या करेगी जन्म ले बेटी यहाँ साँस लेने के काबिल फिजा नहीं , इस अँधेरे को जो दूर कर सके ऐसा एक भी रोशन दिया नहीं !’  फिजां बदल रही है प्रयास चल रहे हैं। हालांकि समाज में भेडि़ये हैं लेकिन वे दिन व दिन कम हो रहे हैं। शब्द मार्मिक हैं और असरकारक हैं। आन्दोलन में तेजी लाने में समर्थ हैं। चित्रण के लिए बधाई।। महारथी।।


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