! मेरी अभिव्यक्ति !

तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने, दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी . जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

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रेप के आगे बदजुबानी की औकात क्या ?

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”हम आह भी भरते हैं तो हो जाते हैं बदनाम,
वो क़त्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होती .”
हमेशा के लिए ये शेर शायद महिलाओं की स्थिति को देखते हुए ही सही कहा जा सकता है क्योंकि कुछ भी गलत अगर महिला के साथ होता है तो लौट-फेर कर उसकी जिम्मेदारी उसी के कंधे पर डाली जाती है .पति अगर किसी और औरत के चक्कर में पड़ गया तो कहा जाता है कि-”पत्नी की ही तरफ से उदासीनता नज़र आई होगी ,वर्ना वह कहीं और क्यों मुंह मारता?” बेटा अगर बिगड़ जाये तो माँ ने ध्यान ही नहीं रखा होगा ,बेटी के साथ छेड़छाड़ ,रेप हो जाये तो भी माँ की ही जिम्मेदारी कि उसने लड़की के लच्छन ही नहीं देखे कि लड़की कहाँ फिरती है किसके साथ फिरती है ?कहने का तात्पर्य यह है कि हर गलत स्थिति की जिम्मेदार माँ अर्थात महिला ही है और हमारे यहाँ के नेता वही जो पुरुष हैं अपनी और कोई जिम्मेदारी समझें न समझें औरत की सभी जिम्मेदारियों को बखूबी समझते हैं और उनका बखान करने से भी नहीं हिचकते .इसी योग्यता के बलबूते पर आये दिन नेता गण अपनी पुरुष बुद्धि का बहुत ही समझदारी से परिचय देते नज़र आते हैं यही योग्यता आज के जनवाणी में दिखाई है पैक्सफेड के चेयरमेन तोताराम यादव ने -जो कहते हैं -
अपनी मर्जी से रेप कराती हैं महिलाएं .”

रेप घटनाएँ बढ़ी हैं और निरंतर बढ़ रही हैं किन्तु उनसे भी अधिक बढ़ रही है यह बदजुबानी जिसमे अपराध के वास्तविक कारण को और कारक को नज़रअंदाज कर उसके पीड़ित पर दोष मढ़कर अपराधी को ”क्लीन-चिट ”दी जा रही है और यही कारण है कि अपराध पर रोक नहीं लग पा रही है बल्कि अपराधी ऐसे ऐसे वक्तव्यों के जरिये अपने को बेचारा दिखाकर अपने गुनाह की वृति से बाहर निकल आ रहा है और गुनाह की जिम्मेंदारी गुनाह की पीड़ित पर ही डाले जा रहा है .सही है जब देश के ,समाज के आदर्श कहे जाने वाले ,मार्गदर्शक कहे जाने वाले मुखों से ऐसी आदर्श वाणी का उच्चारण होगा तब ऐसे अपराध करने वाले अपराधी के हाथ और मन को कैसे रोका
जा सकता है जबकि वह तो पहले ही गुनाहों के अपवित्र दलदल से लबरेज है उसके लिए तो पीड़ित नारी के मुख से बस यही निकल सकता है -
”तू हर तरह से जालिम मेरा सब्र आज़मा ले ,
तेरे हर सितम से मुझको नए हौसले मिले हैं .”

[PUBLISHED IN JANWANI'S PATHAKVANI ON 10JUNE2015]

शालिनी कौशिक
[कौशल ]



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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
June 9, 2015

प्रिय शालनी जी बहुत बात हर बात में पीड़िता को दोष देना चलन बन गया है एक तरफ नारी अधिकारों की बात की जाती है दूसरी और उसे दबाने का हर प्रयत्न किया जाता हैआज कल बीबी होते हुए भी किसी दूसरी से संबंध बनाना चलन बन गया है विरोध करने पर बीबी को इतना प्रताड़ित करते हैं देखा नहीं जाता कही बच्चों की मजबूरी कहीं आर्थिक मजबूरी कहीं जुल्म सहने की आदत महिला को जुल्म सहने के लिए विवश कर देती हैं एक पढ़ी लिखी नौकरी पेशा को उसका पति सड़क पर घसीट कर मार रहा कारण एक दूसरी महिला से उसके संबंध थे वह चाहता था यह कुछ न कहे यह चुप रहे बच्चे चीख रहे थे पूरी कलौनी थी केवल में और दो एक महिलाएं निकल कर आई बाकी सब चुप मैने कहां इन्सान हो दर्द होता है क्यों सह रही हो उसने कहा क्या करूँ शादी लायक दो बहनें हैं हमने पुलिस बुलाई पुलिस वाले कहने लगे यह शिकायत करें हम अभी अरेस्ट करते हैं पर महिला चुपचाप ऊपर चली गई वह राक्षस भी हुंकारता चला गया आप हैरान होगी वह महिला और पति बहुत अच्छी जगह नौकरी करते थे अच्छी तनखा थी महिला की तनखा उससे ज्यादा कुछ दिनों बाद पति उसे लेकर नए घर में रहने चला गया कई बार मन भारी हो जाता शोभा


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