! मेरी अभिव्यक्ति !

तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने, दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी . जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

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पर्यावरण दिवस -धरती माँ की चेतावनी

Posted On: 1 Jun, 2015 Others,कविता,Celebrity Writer में

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दुश्मन न बनो अपने ,ये बात जान लो ,

कुदरत को खेल खुद से ,न बर्दाश्त जान लो .



चादर से बाहर अपने ,न पैर पसारो,

बिगड़ी जो इसकी सूरत ,देगी घात जान लो .



निशदिन ये पेड़ काट ,बनाते इमारते ,

सीमा सहन की तोड़ ,रौंदेगी गात जान लो .



शहंशाह बन पा रहे ,जो आज चांदनी ,

करके ख़तम हवस को ,देगी रात जान लो .



जो बोओगे काटोगे वही कहती ”शालिनी ”

कुदरत अगर ये बिगड़ी ,मिले मौत जान लो .



शालिनी कौशिक

[कौशल ]



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
June 3, 2015

प्रिय शालिनी जी पर्यावरण के विषय पर बहुत सुंदर कविता हमें अपने हाथों प्रकृति के साथ साथ खिलवाड़ किया है इतना प्रदूषण फैलाया है उसका परिणाम हम स्वयं भोग रहे हैं |

jlsingh के द्वारा
June 2, 2015

जो बोओगे काटोगे वही कहती ”शालिनी ” कुदरत अगर ये बिगड़ी ,मिले मौत जान लो . सही कहा आपने!


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