! मेरी अभिव्यक्ति !

तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने, दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी . जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

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खादिम है तेरा खाविंद ,क्यूँ सिर चढ़े पड़ी हो .

Posted On: 29 May, 2015 Others,कविता,Celebrity Writer में

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क्यूँ खामखाह में ख़ाला,खारिश किये पड़ी हो ,

खादिम है तेरा खाविंद ,क्यूँ सिर चढ़े पड़ी हो .

…………………………

ख़ातून की खातिर जो ,खामोश हर घड़ी में ,

खब्ती हो इस तरह से ,ये लट्ठ लिए पड़ी हो .

…………………………………………..

खिज़ाब लगा दिखते,खालू यूँ नौजवाँ से ,

खरखशा जवानी का ,किस्सा लिए पड़ी हो .

…………………………………………..

करते हैं खिदमतें वे ,दिन-रात लग तुम्हारी ,

फिर क्यूँ न मुस्कुराने की, जिद किये पड़ी हो .

…………………………………………..

करते खुशामदें हैं ,खुतबा पढ़ें तुम्हारी ,

खुशहाली में अपनी क्यूँ,खंजर दिए पड़ी हो .

…………………………………………..

खिलवत से दूर रहकर ,खिलक़त को बढ़के देखो ,

क्यूँ खैरियत की अपनी ,खिल्ली किये पड़ी हो .

…………………………………………..

ऐसे खाहाँ की खातिर ,रोज़े ये दुनिया रखती ,

पर खामख्याली में तुम ,खिसियाये हुए पड़ी हो .

…………………………………………..

खुद-इख़्तियार रखते ,खुसिया बरदार हैं फिर भी ,

खूबी को भूल उनकी ,खटपट किये पड़ी हो .

…………………………………………..

क्या जानती नहीं हो ,मजबूरी खुद खसम की ,

क्यूँ सारी दुख्तरों को ,सौतन किये पड़ी हो .

…………………………………………..

”शालिनी ” कहे खाला,खालू की कुछ तो सोचो ,

चढ़ते वे कैसे ऊपर ,जब बेंत ले पड़ी हो .

…………………………………………..

शालिनी कौशिक

[WOMAN ABOUT MAN]

शब्दार्थ :-खाविंद-पति ,खातून-पत्नी ,खाला-मौसी ,खालू-मौसा खारिश -खुजली ,खुसिया बरदार -सभी तरह की सेवा करके खुश रखने वाला ,खर खशा-व्यर्थ का झगडा ,खाहाँ-चाहने वाला ,खिलवत -एकांत ,खिलक़त-प्रकृति ,खामख्याली -नासमझी



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
May 30, 2015

प्रिय शालनी जी खूवसूरत गजल शोभा

advpuneet के द्वारा
May 30, 2015

बहुत सुन्दर कविता है आदरणीया शालिनी जी.


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