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गुलाम हर किसी को समझें हैं मर्द सारे

Posted On: 17 Apr, 2015 social issues,कविता,Celebrity Writer में

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हर दौर पर उम्र में कैसर हैं मर्द सारे ,
गुलाम हर किसी को समझें हैं मर्द सारे .
”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””’
बेटे का जन्म माथा माँ-बाप का उठाये ,
वारिस की जगह पूरी करते हैं मर्द सारे.
””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””’
ख़िताब पाए औरत शरीक-ए-हयात का ,
ठाकुर ये खुद ही बनते फिरते हैं मर्द सारे .
”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””’
रुतबा है उसी कुल का बेटे भरे हैं जिसमे ,
जिस घर में बसे बेटी मुल्ज़िम हैं मर्द सारे .
”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””’
लड़की जो बढे आगे रट्टू का मिले ओहदा ,
दिमाग खुद में ज्यादा माने हैं मर्द सारे .
”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””’
जिस काम में भी देखें बढ़ते ये जग में औरत ,
मिलकर ये बाधा उसमे डाले हैं मर्द सारे .
””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
मिलती जो रियायत है औरत को हुकूमत से ,
जरिया बनाके उसको लेते हैं मर्द सारे .
”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””’
आरामतलब जीवन औरत के दम पे पायें ,
आसूदा न दो घड़ियाँ देते हैं मर्द सारे .
”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””’
पाए जो बुलंदी वो इनाने-सल्तनत में ,
इमदाद-ए-आशनाई कहते हैं मर्द सारे .
””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””’
बाज़ार-ए-गुलामों से खरीदकर हैं लाते ,
इल्ज़ाम-ए-बदचलन उसे देते हैं मर्द सारे.
”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””’
मेहर न मिले मन का तो मारते जलाकर ,
खुद पे हुए ज़ुल्मों को रोते हैं मर्द सारे .
””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
हालात ”शालिनी”ही क्या -क्या बताये तुमको ,
देखो इन्हें पलटकर कैसे हैं मर्द सारे .
””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
शब्दार्थ:-ठाकुर -परमेश्वर ,कैसर-सम्राट ,आशनाई-प्रेम दोस्ती ,इमदाद -मदद ,आसूदा-निश्चित और सुखी ,इमदाद-ए-सल्तनत -शासन सूत्र .

शालिनी कौशिक
[कौशल ]



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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
April 20, 2015

रुतबा है उसी कुल का बेटे भरे हैं जिसमे , जिस घर में बसे बेटी मुल्ज़िम हैं मर्द सारे …………शालिनी जी बहुत सुंदर लिखा है और सच भी यही है ।

ashokkumardubey के द्वारा
April 19, 2015

मर्दों के बारे में आपके द्वारा लिखी गयी पंक्तियाँ पढ़ीं इस विषय पर मिडिया और टेलीविजन पर कितनी ही बार चर्चा हुयी पर महिलाओं पर अत्याचार दिनों- दिन बढ़ता ही जा रहा है भारत की नारियों पर होनेवाले अत्याचार को कैसे रोका जाये इस विषय पर भी आप कुछ लिखें निश्चित तौर पर उसे सराहा जायेगा क्यूंकि आप बहुत अच्छा लिखती रहीं हैं मैं तो आपका प्रशंसक रहा हूँ

achyutamkeshvam के द्वारा
April 19, 2015

सुन्दर रचना,स्त्रीवादी तेवर पूरी रंगत में,बधाई


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