! मेरी अभिव्यक्ति !

तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने, दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी . जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

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भारत में मताधिकार ही समाप्त करा दो राउत जी

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हमारा संविधान हमारे देश का सर्वोच्च कानून है और सभी इसका ह्रदय से सम्मान करते हैं अब करते हैं या नहीं ,पूरे विश्वास से नहीं कह सकते किन्तु इतना अवश्य कह सकते हैं कि सम्मान का दिखावा अवश्य करते हैं और विशेषकर वे जिनके हाथों में हमारे इस लोकतंत्र की बागडोर है .लोकतंत्र जिसके लिए बड़े जोर-शोर से कहा जाता है कि ”ये मूर्खों का ,मूर्खों के लिए और मूर्खों के द्वारा किया गया शासन है ” ऐसा केवल कथन रूप में ही नहीं वास्तविकता में भी साबित होता है क्योंकि ये यहाँ की जनता की मूर्खता ही कही जाएगी जो बार बार अपने ऊपर मूर्खों को राज करने का मौका देती है और अपने ही पैरों में ठीक वैसे ही कुल्हाड़ी मार लेती है जैसी कुल्हाड़ी कालिदास पेड़ की उस डाल पर मार रहे थे जिस पर वे खुद बैठे हुए थे और जनता के पैरों में कुल्हाड़ी अबकी बार मारी है राजग की सहयोगी पार्टी शिवसेना के राज्यसभा संसद राउत ने जिन्होंने ओवेसी बंधुओं पर हमला बोलते हुए देश के सर्वोच्च कानून संविधान की इस संकल्पना, जिसके द्वारा संविधान सामाजिक ,आर्थिक एवं राजनीतिक न्याय की स्थापना करता है ,पर ही गहरा आघात कर दिया ,उन्होंने कहा कि मुस्लिमों से मताधिकार छीन लेना चाहिए क्योंकि मताधिकार ख़त्म होते ही ख़त्म हो जाएगी मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति, क्या भारत में केवल मुस्लिम वोट बैंक की ही राजनीति चल रही है यहाँ तो विभिन्न जातियों की भी वोट बैंक की राजनीति की जाती है जिसमे कोई दलित वोट बैंक की राजनीति करता है ,तो कोई जाट वोट बैंक की ,कोई यादव वोट बैंक की राजनीति करता है तो कोई ब्राह्मण वोट बैंक की ,ऐसे में अगर इस देश में वोट बैंक की राजनीति ऐसे ही ख़त्म करनी है तो इन सबकी वोट भी खत्म की जानी चाहियें और ऐसे में तो भारत में मताधिकार ही समाप्त कर देना चाहिए क्योंकि न मताधिकार होगा और न वोट बैंक की राजनीति .

शालिनी कौशिक

[कौशल ]



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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rameshagarwal के द्वारा
April 15, 2015

जय श्री राम  देश में समस्या है की सेक्युलर ब्रिगेड,कुछ मीडिया वाले.अपने को बुद्धिजीवी समझने वाले और कुछ मीडिया के लोग हिन्दुओ पर हमला करते हुए अक्सर अल्पसंझ्यको की बात करते जबकि अल्प्संयक समुदाय बहुत अच्छी तरह से है.कभी कश्मीरी पंडितो की कोई क्यों नहीं सोचता है?राहत का बयान गलत है पर उसका दर्द भी तो देखे?

Shobha के द्वारा
April 14, 2015

प्रिय शालनी जी यह देश संविधान से चलता है आप स्वयं कानून की जानकार है सर्वोच्च न्यायालय ने सदैव् उसकी रक्षा की है अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का और मीडिया में छाए रहने के लिए कुछ लोग इस तरह का प्रलाप करते रहते हैं जिस दिन मीडिया इन्हें भाव देना बंद कर देगा यह प्रलाप भी बंद हो जाएंगे | डॉ शोभा

Shambhu Choudhary के द्वारा
April 14, 2015

भारत के संविधान भाग-3 देश के नागरिकों के मूलभूत अधिकारों की श्रृंखला में अनुच्छेद की धारा 25 से 30 के बीच धर्म से संबंधित कई धाराएं व उप धाराएं जोड़ी गई है। इस धारा की मूल भावना उन अल्पसंख्यक समुदायों को सामाजिक सुरक्षा देना है। परन्तु यदि यही धारा भारत की असुरक्षा का कारण बन जाए तो इस पर हमें पुनः सोचने की और अल्पसंख्यक शब्द को पुनः परिभाषित करने की जरूरत हो जाती है।


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