! मेरी अभिव्यक्ति !

तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने, दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी . जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

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............मर्दों के यूँ न कटें पर .

Posted On: 26 Feb, 2015 social issues,कविता,Celebrity Writer में

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Muslim bride and groom at the mosque during a wedding ceremony - stock photo

फिरते थे आरज़ू में कभी तेरी दर-बदर ,

अब आ पड़ी मियां की जूती मियां के सर .

…………………………………………………….

लगती थी तुम गुलाब हमको यूँ दरअसल ,

करते ही निकाह तुमसे काँटों से भरा घर .

………………………………………………..

पहले हमारे फाके निभाने के थे वादे ,

अब मेरी जान खाकर तुम पेट रही भर .

………………………………………………………

कहती थी मेरे अपनों को अपना तुम समझोगी ,

अब उनको मार ताने घर से किया बेघर .

………………………………………………………..

पहले तो सिर को ढककर पैर बड़ों के छूती ,

अब फिरती हो मुंह खोले न रहा कोई डर .

………………………………………………………

माँ देती है औलाद को तहज़ीब की दौलत ,

मक्कारी से तुमने ही उनको किया है तर .

………………………………………………………….

औरत के बिना सूना घर कहते तो सभी हैं ,

औरत ने ही बिगाड़े दुनिया में कितने नर .

………………………………………………….

माँ-पिता,बहन-भाई हिल-मिल के साथ रहते ,

आये जो बाहरवाली होती खटर-पटर .

……………………………………………………….

जीना है जो ख़ुशी से अच्छा अकेले रहना ,

”शालिनी ”चाहे मर्दों के यूँ न कटें पर .

………….

शालिनी कौशिक

[WOMAN ABOUT MAN]



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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Bhola nath Pal के द्वारा
March 2, 2015

शालिनी जी !महिला का महिला पर यह तंज .निष्पक्षता और सहस को प्रणाम ………….

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
March 2, 2015

शालिनी जी होली के अवसर पर दिल फेंक व्यंग रंग मुबारक हो ओम शांति शांति 

deepak pande के द्वारा
March 2, 2015

लगती थी तुम गुलाब हमको यूँ दरअसल , करते ही निकाह तुमसे काँटों से भरा घर . ……………………………………………….. पहले हमारे फाके निभाने के थे वादे , अब मेरी जान खाकर तुम पेट रही भर . EK HEE RACHNA ME POORI सच्चाई बयां कर दी


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