! मेरी अभिव्यक्ति !

तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने, दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी . जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

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कोमल देह की मलिका ,ख्वाबों की कामिनी है ,

Posted On: 21 Feb, 2015 social issues,कविता,Celebrity Writer में

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कोमल देह की मलिका ,ख्वाबों की कामिनी है ,

ख्वाहिश से भरे दिल की ,माधुरी मानिनी है .
……………………………………………………..
नज़रें जो देती उसको ,हैं मान महनीय का ,
देती है उन्हें आदर ,ऐसी कामायनी है .
………………………………………………….
कायरता भले मर्दों को ,आकर यहाँ जकड़ ले ,
देती है बढ़के संबल ,साहस की रागिनी है .
………………………………………………………….
कायम मिजाज़ रखती ,किस्मत से नहीं रूकती ,
दफनाती मुसीबत को ,दमकती दामिनी है .
…………………………………………………………..
जीवन के हर सफ़र में ,चलती है संग-संग में ,
गागर में भरती सागर ,ये दिल से ”शालिनी” है .
………………………………………………………………….
शब्दार्थ -महनीय-पूजनीय /मान्य ,कामायनी -श्रृद्धा ,कायम मिजाज़ -स्थिर चित्त ,शालिनी -गृहस्वामिनी .

शालिनी कौशिक

[कौशल ]



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
February 23, 2015

प्रिय शालिनी जी बड़ी नाजुक कविता आखिर मैं जीवन के हर ——–शालिनी है अति सुंदर भाव शोभा

jlsingh के द्वारा
February 22, 2015

कायरता भले मर्दों को ,आकर यहाँ जकड़ ले , देती है बढ़के संबल ,साहस की रागिनी है बहुत सटीक …..


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