! मेरी अभिव्यक्ति !

तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने, दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी . जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

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आपसी प्यार -तभी विवाह सफल

Posted On: 20 Feb, 2015 social issues,Celebrity Writer,Others में

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बैंड बाजे आजकल बहुत जोर-शोर से बज रहे हैं ,चारों ओर बहुत पहले से ही शादी ब्याह के इस मुहूर्त की शोभा होने लगती है ,चहल-पहल बढ़ने लगती है ओर इससे भी बहुत पहले होने लगता है लड़के वालों के घर का नव-निर्माण बिलकुल ऐसे ही जैसे कि उन्हें वास्तव में इसी दिन की तलाश थी कि कब हमारे घर की लक्ष्मी आये औऱ हमारे घर की शोभा बढे .

आरम्भ में तो ऐसा ही लगता है कि लड़के वाले बहु के आगमन की तैयारियां यही सब सोच कर करते हैं और जिस घर में रह रहे होते हैं चैन से आराम से ,सुकून से ,जिसमे उन्हें कोई परेशानी नहीं होती बल्कि एक ऐसा घर होता है वह उनके लिए जो कि आस-पास के सभी घरों से हर मायने में बेहतर होता है और तो और ऐसा कि उसके सामने अन्य कोई घर कबाड़े के अलावा कुछ नहीं होता किन्तु लड़के की शादी तय होते ही लड़के वाले उस घर में नए नए परिवर्तन करने लगते हैं न केवल रंगाई -पुताई अपितु फर्श से लेकर दीवार तक खिड़की से लेकर घर की चौखट तक वे पलट डालते हैं ,लगता था कि वास्तव में कितना उत्साह होता है बहू लाने का ,किन्तु जब असलियत मालूम हुई तो पैरों तले जमीन ही खिसक गयी क्योंकि ये उत्साह यहाँ लड़के को तो जीवनसाथी पाने का तो होता ही है उससे भी कहीं ज्यादा उसे और उसके परिजनों को होता है एक ऐसे दहेज़ का जिसके लिए वे बचपन से लेकर आज तक अपने लड़के को पढ़ाते आये थे ,उसकी ज़रूरतों को पूरा करते आये थे ,कुल मिलाकर उनका निवेश अब चार गुना होकर मिलने का समय आ जाता है और यही कारण है लड़के वालों का घर में बहुत से नव-परिवर्तन कराने का ,जिनके लिए सारा धन वे लड़की वालों से लेने वाले हैं .
आज लोगों ने इस सम्बन्ध को इतना निम्न स्तर प्रदान कर दिया है कि कहीं भी शादी -ब्याह के सुअवसर पर दोनों पक्ष के लोगों में मेल-मिलाप की ख़ुशी नहीं दिखाई देती अपितु दिखाई देता है कोरा आडम्बर और एक दूसरे को पैसे में नीचा दिखाने की भावना जिसने इस सुन्दर अवसर को निकृष्ट स्वरुप प्रदान कर दिया है .
कौन समझाए कि ये अवसर दो लोगों के ही मेल-मिलाप का नहीं अपितु दो परिवारों दो संस्कृतियों के मेल का अवसर है और लड़का हो या लड़की दोनों के लिए एक नव जीवन की शुरुआत है जिसमे उन्हें सभी का प्यार व् सहयोग आवश्यक है न कि दिखावा और नीच-ऊंच की भावना .अगर इस सम्बन्ध को एक मीठा एहसास देना है तो इसमें प्यार भरें ,विश्वास भरें न कि पैसे और कुटिलता फिर देखिये ये मधुरता की मिसाल अवश्य कायम करेगा .

शालिनी कौशिक
[कौशल ]



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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
February 21, 2015

शालिनी जी यहाँ में आपकी बात काट रही हूँ मैने की जोड़े देखे हैं उनमें प्यार क्या एक दुसरे के प्रति पसंदगी भी नहीं है परन्तु बच्चों की खातिर उन्होंने पूरा जीवन साथ बिताया बच्चे भी बहुत अच्छे पाले हाँ आज की जेनरेशन यदि जन्म दिन पर पति विश करना भूल गयाहंगामा हो गया दोनों एक दुसरे को समझने की कोशिश करे एक दिन प्यार भी हो जाता हैं हाँ आपने बहुत अच्छा प्रश्न उठाया हैं डॉ शोभा


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