! मेरी अभिव्यक्ति !

तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने, दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी . जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

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क़त्ल करने मुझे देखो , कब्र में घुस के बैठे हैं .

Posted On: 12 Jan, 2015 Others,कविता,Celebrity Writer में

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नहीं वे जानते मुझको, दुश्मनी करके बैठे हैं ,
मेरे कुछ मिलने वाले भी, उन्हीं से मिलके बैठे हैं ,
समझकर वे मुझे कायर, बहुत खुश हो रहे नादाँ
क़त्ल करने मुझे देखो , कब्र में घुस के बैठे हैं .
…………………………………………………..
गिला वे कर रहे आकर , हमारे गुमसुम रहने का ,
गुलूबंद को जो कानों से , लपेटे अपने बैठे हैं .
…………………………………………………………
हमें गुस्ताख़ कहते हैं , गुनाह ऊँगली पे गिनवाएं ,
सवेरे से जो रातों तक , गालियाँ दे के बैठे हैं .
…………………………………………………..
नतीजा उनसे मिलने का , आज है सामने आया ,
पड़े हम जेल में आकर , वे घर हुक्का ले बैठे हैं .
…………………………………………………………
रखे जो रंजिशें दिल में , कभी न वो बदलता है ,
भले ही अपने होठों पर , तबस्सुम ले के बैठे है .
………………………………………………..
नज़ीर ”शालिनी ” की ये , नज़रअंदाज़ मत करना ,
कहीं न कहना पड़ जाये , मियां तो लुट के बैठे हैं .
………………………………………………..

शालिनी कौशिक
[कौशल ]



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8 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
January 19, 2015

प्रिय शालनी जी बहुत खुबसूरत नज्म हर लाइन खूबसूरत मेरी वैसे ही ज्यादा ज्यादा चर्चित में नज्म के शीर्षक पर नजर पड गई पढने पर मुहं से वाह वाह निकली यह मुशायरे में वाह वाह लूटने वाली गजल है डॉ शोभा

Santlal Karun के द्वारा
January 18, 2015

आदरणीया शालिनी जी, अच्छी ग़ज़ल के लिए हार्दिक साधुवाद एवं सद्भावनाएँ ! — “समझकर वे मुझे कायर, बहुत खुश हो रहे नादाँ क़त्ल करने मुझे देखो , कब्र में घुस के बैठे हैं”

yamunapathak के द्वारा
January 18, 2015

गहरी अभिव्यक्ति है शालिनी जी

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
January 16, 2015

रखे जो रंजिशें दिल में , कभी न वो बदलता है , भले ही अपने होठों पर , तबस्सुम ले के बैठे है …………बहुत ही सुंदर रचना । आपको तहे दिल से शुक्रिया कि आपने इतंना अच्छा लिखा और हमे इसे पढने का अवसर मिला । गहन चिंतन और एहसासों से परिपूर्ण खूबसूरत रचना ।

ravindersingh के द्वारा
January 15, 2015

बहुत ही सुन्दर रचना वाह शालिनी जी

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
January 14, 2015

नज़ीर ”शालिनी ” की ये , नज़रअंदाज़ मत करना , कहीं न कहना पड़ जाये , मियां तो लुट के बैठे हैं .. वाह वाह ..मजा गया ओम शांति शांति

Bhola nath Pal के द्वारा
January 14, 2015

शालिनी जी ! अंतस को बयां करती बेजोड़ रचना .धन्यवाद …….

sanjeevtrivedi के द्वारा
January 13, 2015

शालिनी जी बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति..


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