! मेरी अभिव्यक्ति !

तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने, दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी . जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

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साध्वी निरंजन ज्योति -दण्डित होने योग्य

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खाद्य एवं प्रसंस्करण राज्य मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति के अमर्यादित बोल संसद के दोनों सदनों में कोहराम मचाते हैं और राजनीतिक कार्यप्रणाली के रूप में विपक्ष् उन पर कार्यवाही चाहता है ,उनका इस्तीफा चाहता है और उन पर एफ.आई.आर. दर्ज़ करने की अपेक्षा रखता है और सत्ता वही पुराने ढंग में घुटने टेके खड़ी रहती है . अपने मंत्री के माफ़ी मांगने को आधार बना उनका बचाव करती है जबकि साध्वी निरंजन ज्योति ने जो कुछ कहा वह सामान्य नहीं था .भारतीय कानून की दृष्टि में अपराध था .वे दिल्ली की एक जनसभा के दौरान लोगों को ”रामजादे-हरामजादे में से एक को चुनने को कहती हैं ” वे कहती हैं -”कि दिल्ली विधानसभा चुनावों में मतदाताओं को तय करना है कि वह रामजादों की सरकार बनायेंगें या हरामजादों की .”राम के नाम पर ६ दिसंबर १९९२ की उथल-पुथल आज भी भारतीय जनमानस के मन से नहीं उतर पाई है और २२ वर्ष बाद फिर ये देश को उसी रंग में रंगने को उतर रहे हैं और ऐसे में इनके वेंकैय्या नायडू निरंजन ज्योति के माफ़ी मांगने को पर्याप्त कह मामले को रफा-दफा करने की कोशिश कर रहे हैं जबकि यह सीधे तौर पर राष्ट्र की अखंड़ता पर हमला है जिसके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा १५३-ख कहती है -
१५३-ख- [1] जो कोई बोले गए या लिखे गए शब्दों द्वारा या संकेतों द्वारा या दृश्यरूपणों द्वारा या अन्यथा -
[क] ऐसा कोई लांछन लगाएगा या प्रकाशित करेगा कि किसी वर्ग के व्यक्ति इस कारण से ही कि वे किसी धार्मिक ,मूलवंशीय ,भाषाई या प्रादेशिक समूह या जाति या समुदाय के सदस्य हैं ,विधि द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठां नहीं रख सकते या भारत की प्रभुता और अखंडता की मर्यादा नहीं बनाये रख सकते ,अथवा
[ख] यह प्राख्यान करेगा ,परामर्श देगा ,सलाह देगा ,प्रचार करेगा या प्रकाशित करेगा कि किसी वर्ग के व्यक्तियों को इस कारण से कि वे किसी धार्मिक ,मूलवंशीय ,भाषाई या प्रादेशिक समूह या जाति या समुदाय के सदस्य हैं ,भारत के नागरिक के रूप में उनके अधिकार न दिए जाएँ या उन्हें उनसे वंचित किया जाये ,अथवा
[ग] किसी वर्ग के व्यक्तियों की बाध्यता के सम्बन्ध में इस कारण कि वे किसी धार्मिक ,मूलवंशीय ,भाषाई या प्रादेशिक समूह या जाति या समुदाय के सदस्य हैं ,कोई प्राख्यान करेगा ,परामर्श देगा ,अभिवाक करेगा या अपील करेगा अथवा प्रकाशित करेगा और ऐसे प्राख्यान ,परामर्श ,अभिवाक या अपील से ऐसे सदस्यों तथा अन्य व्यक्तियों के बीच असामंजस्य अथवा शत्रुता या घृणा या वैमनस्य की भावनाएं उत्पन्न होती हैं या उत्पन्न होनी सम्भाव्य हैं ,
वह कारावास से ,जो तीन वर्ष तक का हो सकेगा ,या जुर्माने से या दोनों से दण्डित किया जायेगा .
और यहाँ साध्वी निरंजन ज्योति के ये बोल भारत की एकता व् अखंडता के प्रतिकूल हैं और इस धारा के अधीन दण्डित होने योग्य .

शालिनी कौशिक
[कानूनी ज्ञान ]

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

dhirchauhan72 के द्वारा
December 13, 2014

हरामजादों ने अपने आप समझ लिया और दुनियाँ को बता दिया की हम रामज़ादे नहीं हैं …….ये कांग्रेसी होना बवासीर होने के बराबर है ……..मोदी और राम जादों को समझ लेना चाहिए ये देश राम का नहीं हराम है !

Bhola nath Pal के द्वारा
December 6, 2014

यदि अपराध के लिए सजा दिया जाना ही अनिवार्य है तो सजा काट रहे अपराधियों को जमानत क्यों दे दी जाती है ? क्या मेहबूवा मुफ़्ती का यह बयान की बुलेट पर वैलेट भारी को मीडिया ने अतिरंजित किया इसीलिए आतंकियों का यह हमला हुआ, किसी अपराध की श्रेणी मैं नहीं आता | क्या कानून की कठोरता और लचीलापन दंड, सुधारभावना का द्योतक नहीं फिर भी उच्च पदो को सुशोभित करने वाले व्यक्तियों के लिए यह कानून क्यों नहीं बनाया जाता की उनका संवेदना शून्य होना अनिवार्य है ?


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