! मेरी अभिव्यक्ति !

तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने, दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी . जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

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कृतज्ञ दुनिया २ अक्टूबर की

Posted On: 30 Sep, 2014 कविता,Celebrity Writer,Special Days में

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एक की लाठी सत्य अहिंसा एक मूर्ति सादगी की,

दोनों ने ही अलख जगाई देश की खातिर मरने की .

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जेल में जाते बापू बढ़कर सहते मार अहिंसा में ,

आखिर में आवाज़ बुलंद की कुछ करने या मरने की .

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लाल बहादुर सेनानी थे गाँधी जी से थे प्रेरित ,

देश प्रेम में छोड़ के शिक्षा थामी डोर आज़ादी की .

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सत्य अहिंसा की लाठी ले फिरंगियों को भगा दिया ,

बापू ने अपनी लाठी से नीव जमाई भारत की .

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आज़ादी के लिए लड़े वे देश का नव निर्माण किया ,

सर्व सम्मति से ही संभाली कुर्सी प्रधानमंत्री की .

………………………………………………………….

मिटे गुलामी देश की अपने बढ़ें सभी मिलकर आगे ,

स्व-प्रयत्नों से दी है बढ़कर साँस हमें आज़ादी की .

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दृढ निश्चय से इन दोनों ने देश का सफल नेतृत्व किया

ऐसी विभूतियाँ दी हैं हमको कृतज्ञ दुनिया इस दिन की .

शालिनी कौशिक

[कौशल]



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5 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
October 4, 2014

दोनों ने ही अलख जगाई देश की खातिर मरने की ……………शालिनी जी सुन्दर रचना । 

shakuntlamishra के द्वारा
October 2, 2014

आपने लाल बहादुर शाश्त्री जी को भी अपनी याद किया! सुन्दर रचना शाश्त्री जी कम ही याद किये जातें है -बधाई हो

sadguruji के द्वारा
October 2, 2014

दृढ निश्चय से इन दोनों ने देश का सफल नेतृत्व किया ऐसी विभूतियाँ दी हैं हमको कृतज्ञ दुनिया इस दिन की ! आदरणीया शालिनी कौशिक जी ! इस अतिसुन्दर और भावपूर्ण श्रद्धांजलिमय कविता के सृजन के लिए आपका बहुत बहुत अभिनन्दन ! मुझे बहुत अच्छी लगी ! इस सार्थक प्रस्तुति के लिए ह्रदय से आभार !

DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
October 1, 2014

bahut sundar v sarthak post .hardik aabhar

Shobha के द्वारा
October 1, 2014

शालनी जी आपने जी आपने बापू और लाल बहादुर शास्त्री जी को सटीक श्रद्धांजली दी है पढ़ कर बहुत अच्छा लगा शोभा


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