! मेरी अभिव्यक्ति !

तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने, दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी . जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

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मुल्क से बढ़कर न खुद को समझें हम,

Posted On: 22 Sep, 2014 कविता,Celebrity Writer,Others में

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”मुख्तलिफ ख्यालात भले रखते हों ,मुल्क से बढ़कर न खुद को समझें हम,
बेहतरी हो जिसमे अवाम की अपनी ,ऐसे क़दमों को बेहतर समझें हम.
……………………………………………………………………………………………
है ये चाहत तरक्की की राहें आप और हम मिलके पार करें ,
जो सुकूँ साथ मिलके चलने में इस हकीक़त को ज़रा समझें हम .
……………………………………………………………………..
कभी हम एक साथ रहते थे ,रहते हैं आज जुदा थोड़े से ,
अपनी आपस की गलतफहमी को थोड़ी जज़्बाती भूल समझें हम .
……………………………………………………………………………….
देखकर आंगन में खड़ी दीवारें आयेंगें तोड़ने हमें दुश्मन ,
ऐसे दुश्मन की गहरी चालों को अपने हक में कभी न समझें हम .
…………………………………………………………………………………….
न कभी अपने हैं न अपने कभी हो सकते ,
पडोसी मुल्कों की फितरत को खुलके समझें हम .
………………………………………………………………………………….
कहे ये ”शालिनी” मिल बैठ मसले सुलझा लें ,
अपने अपनों की मोहब्बत को अगर समझें हम .
……………………………………………………………..
शालिनी कौशिक
[ कौशल ]



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5 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yamunapathak के द्वारा
September 25, 2014

बहुत खूब शालिनी जी देखकर आंगन में खड़ी दीवारें आयेंगें तोड़ने हमें दुश्मन , ऐसे दुश्मन की गहरी चालों को अपने हक में कभी न समझें हम . साभार

jlsingh के द्वारा
September 23, 2014

आदरणीया शालिनी जी, सादर अभिवादन! बहुत ही साढ़े शब्दों में आपने चेतावनी दी है अगर समझें हम सादर!

sanjay kumar garg के द्वारा
September 23, 2014

“देखकर आंगन में खड़ी दीवारें आयेंगें तोड़ने हमें दुश्मन…. सुन्दर अभिव्यक्ति! आदरणीया शालिनी जी !

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
September 23, 2014

देखकर आंगन में खड़ी दीवारें आयेंगें तोड़ने हमें दुश्मन ,…………राजनीति और भावनाओं से जुडी आपकी यह कविता नि:संदेह एक अच्छा संदेश देने मे सफल हुई है ।

Shobha के द्वारा
September 23, 2014

प्रिय शालिनी जी काफी समय बाद आप का लिखा पढ़ने को मिला है कविता में आपने पूरी राजनीती समझाई हैं आपके विचार पढ़ कर बहुत अच्छा लगा


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