! मेरी अभिव्यक्ति !

तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने, दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी . जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

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मुकम्मल है वही सम्बन्ध मुहब्बत नींव है जिसकी

Posted On: 10 Jul, 2014 social issues,कविता,Celebrity Writer में

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तमन्ना जिसमे होती है कभी अपनों से मिलने की

रूकावट लाख भी हों राहें उसको मिल ही जाती हैं ,

खिसक जाये भले धरती ,गिरे सर पे आसमाँ भी

खुदा की कुदरत मिल्लत के कभी आड़े न आती है .

………………………………………………………………………………..

फ़िक्र जब होती अपनों की समय तब निकले कैसे भी

दिखे जब वे सलामत हाल तसल्ली दिल को आती है ,

दिखावा तब नहीं होता प्यार जब होता अपनों में

मुकाबिल कोई भी मुश्किल रोक न इनको पाती है .

……………………………………………………………..

मुकद्दर साथ है उनके मुक़द्दस ख्याल रखते जो

नहीं मायूसी की छाया राह में आने पाती है ,

मुकम्मल है वही सम्बन्ध मुहब्बत नींव है जिसकी

महक ऐसे ही रिश्तों की सदा ये सदियाँ गाती हैं .

………………………………………………………………..

खोलती है अपनी आँखें जनम लेते ही नन्ही जान

फ़ौज वह नातेदारों की सहमकर देखे जाती है,

गोद माँ की ही देती है सुखद एहसास वो उसको

जिसे पाकर अनजानों में सुकूँ से वो सो पाती है .

……………………………………………………………….

नहीं माँ से बड़ा नाता मिला इस दुनिया में हमको

महीनों कोख में रखकर हमें दुनिया में लाती है ,

जिए औलाद की खातिर ,मरे औलाद की खातिर

मुसलसल कायनात शिद्दत से माँ के नग़मे गाती है .

………………………………………………………………………………………

जहाँ में माँ का नाता ही बिना मतलब जो देता साथ

कभी न माँ की आँखों पर लोभ की बदली छाती है ,

भले ही दीवारें ऊँची खड़ी हों उसकी राहों में

कभी औलाद से मिलना न उसका रोक पाती हैं .

……………………………………………………….

”शालिनी ”ने यहाँ देखे तमाम नाते रिश्तेदार

बिना मतलब किसी को ना किसी की याद आती है ,

एक ये माँ ही होती है करे महसूस दर्द-ए-दिल

इधर हो मिलने की हसरत उधर हाज़िर हो जाती है .

……………………………………………………..

शालिनी कौशिक

[कौशल ]



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33 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

ब्लॉग बुलेटिन की आज शुक्रवार २५ जुलाई २०१४ की बुलेटिन — कुछ याद उन्हें भी कर लें– ब्लॉग बुलेटिन — में आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है … सादर आभार!

vandana singh के द्वारा
July 24, 2014

शालिनी जी, बेस्ट ब्लॉगर ऑफ़ द वीक के लिए बहुत-बहुत बधाई

anuradha nautiyal dhyani के द्वारा
July 22, 2014

सुन्दर अभिव्यक्ति …सच में तभी तो माँ प्रथम देव मानी जाती है ,आपको बहुत बहुत बधाई शालिनीजी. अनुराधा नौटियाल ध्यानी

बधाई…बेस्ट ब्लॉगर हेतु

mrssarojsingh के द्वारा
July 21, 2014

बहुत ही खूबसूरत रचना के लिए मेरी और से हार्दिक बधाई स्वीकार करें शालिनी जी ….

Jyoti के द्वारा
July 21, 2014

शालिनी जी, बेस्ट ब्लॉगर ऑफ़ द वीक के लिए बहुत-बहुत बधाई ! माँ को बहुत ही सुन्दर तरीके से अभिव्यक्त किया है आपने.

pkdubey के द्वारा
July 21, 2014

आदरणीया सादर बधाई -ब्लॉगर ऑफ़ दी वीक -के लिए .बहुत प्रेरणादायक रचना |

Sushma Gupta के द्वारा
July 20, 2014

बहुत ही सारगर्भित गज़ल है शालिनी जी , ”बेस्ट ब्लॉगर ऑफ़ वीक ” हेतु हार्दिक वधाई…

jlsingh के द्वारा
July 20, 2014

आदरणीया शालिनी जी, सादर अभिवादन! और सप्ताह की सर्श्रेष्ठ ब्लॉगर चुने जाने की बधाई ! माँ की कोई भी तुलना माँ को छोटा करना है, सही माने तो माँ में भगवती की रूप आती है. बहुत बहुत बधाई!

girishmukul के द्वारा
July 19, 2014

अनोखी बात एक पूरा अध्यात्मिक प्रवाह है..

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
July 19, 2014

नहीं माँ से बड़ा नाता मिला इस दुनिया में हमको महीनों कोख में रखकर हमें दुनिया में लाती है ।  बधाई आपको । सही मायनों में सम्मान की पात्र है आपकी यह कविता । बेहद सुन्दर लिखा है । 

Santlal Karun के द्वारा
July 19, 2014

आदरणीया शालिनी जी, आप ने प्रभावी शिल्प-रचना के माध्यम से जन्म से लेकर पालन-पोषण तक का महनीय दायित्व संवहन करनेवाली माँ के कृतित्व को भली-भाँति रेखांकित किया है — “नहीं माँ से बड़ा नाता मिला इस दुनिया में हमको महीनों कोख में रखकर हमें दुनिया में लाती है , जिए औलाद की खातिर ,मरे औलाद की खातिर मुसलसल कायनात शिद्दत से माँ के नग़मे गाती है .” … हार्दिक साधुवाद एवं सद्भावनाएँ तथा ‘बेस्ट ब्लॉगर ऑफ़ द वीक’ के चयन पर हार्दिक बधाई !

    July 19, 2014

    संतलाल जी बहुत सुन्दर प्रतिक्रिया द्वारा मुझे बधाई देने के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद

yamunapathak के द्वारा
July 19, 2014

शालिनी जी रचना बहुत अच्छी है .बेस्ट ब्लॉगर के रूप में चयनित होने पर हार्दिक बधाई साभार

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
July 19, 2014

माँ के निष्कपट ,निस्वार्थ एवं अटूट प्रेम की सुंदर अभिव्यक्ति है यह कविता ,बहुत बहुत बधाई बेस्ट ब्लोगर चुने जाने की शालिनी जी .

sadguruji के द्वारा
July 19, 2014

आदरणीया शालिनी कौशिक जी ! बेस्ट बलॉगर आफ दी वीक चुने जाने की बहुत बहुत बधाई !

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
July 11, 2014

मां पर आपकी यह कविता बेहद खूबसूरत है । नहीं माँ से बड़ा नाता मिला इस दुनिया में हमको महीनों कोख में रखकर हमें दुनिया में लाती है ,

sadguruji के द्वारा
July 11, 2014

अच्छी रचना ! आपने बहुत सही कहा है-”शालिनी ”ने यहाँ देखे तमाम नाते रिश्तेदार बिना मतलब किसी को ना किसी की याद आती है , एक ये माँ ही होती है करे महसूस दर्द-ए-दिल इधर हो मिलने की हसरत उधर हाज़िर हो जाती है !!

Shobha के द्वारा
July 11, 2014

शालिनी जी माँ से बढ़ कर कुछ नहीं आपने इस सम्बन्ध का बयान बड़ी खूबसूरती से किया है अगर मेरी अम्मा न्र रहे मैं तो सोच कर कांप जाती हूँ शोभा

Imam Hussain Quadri के द्वारा
July 11, 2014

बहुत ही सुन्दर और नसीहत से भरे शेर हैं बहुत खूब


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