! मेरी अभिव्यक्ति !

तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने, दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी . जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

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औरत को जूती पैर की ही माने आदमी

Posted On: 1 Jul, 2014 social issues,कविता,Celebrity Writer में

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औरत पे ज़ुल्म हो रहे कर रहा आदमी

सच्चाई को कुबूलना ये चाहते नहीं ,

गैरों के कंधे थामकर बन्दूक चलना

ये कर रहे हैं काम मगर मानते नहीं !

…………………………………………………

औरत को जूती पैर की ही माने आदमी

सम्मान देने रोग मान पालते नहीं ,

ये चाहें इसपे बस हुक्म चलाना

करना भला इसका कभी विचारते नहीं !

………………………………………………….

औरत लुटा दे मर्द पर भले ही ज़िंदगी

वे रहते हैं कभी किसी मुगालते नहीं ,

खिदमत हमारी करना औरत की है किस्मत

करना है कुछ उसके लिए ये जानते नहीं !

……………………………………………………..

जनम-जनम का साथ है पत्नी पति का मांगती

ये पत्नी को दिल में कभी उतारते नहीं ,

चाह रखके बेटों की ये बेटियां हैं मारती

ये बुराई तक माँ के लिए हैं मारते नहीं !

…………………………………………………….

”शालिनी ”की तड़प का है ना सबूत कोई

अपने किये को ये कभी धिक्कारते नहीं ,

बेटी हो या बहन हो ,ये पत्नी हो या माँ हो

अपने को किसी हाल ये सुधारते नहीं !

………………………………………………………….

शालिनी कौशिक

[कौशल ]



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

harirawat के द्वारा
July 5, 2014

शालिनी जी आपने समाज के उन खुद गर्ज इंसानो को ही मर्दों का पतिनिधि बना दिया है ! असल में ये आदमी कहलाने का भी हक़ गँवा चुके हैं ! मानता हूँ हैवानो के चौखट पर तड़पती हैं नारियां, समाज के दुर्जन नारी को देते हैं गालियां, पर ये तो आदमी के नाम पर भी काला दाग हैं, समाज के बीच में जहरीले नाग हैं, सभ्य आदमी इन्हे इंसान नहीं मानता, इनकी किसी नस्ल को वो नहीं पहिचानता ! नारी सशक्त है नारी दुर्गा भवानी है, पथ भ्रष्टों को राह दिखा दे नारी घर की रानी है ! किसी को तो जुल्म से टकराना होगा, ऐसे दुष्ट दुर्जन को रह पर लाना होगा ! दिल को छूने वाली कविता !

Shobha के द्वारा
July 2, 2014

शालिनी बहुत दर्दीली कविता लिखी है जिस दिन औरत यह समझ कर मजबूती से पैरों पर खड़ी हो जाएगी वह घर की जरूरत बन जाएगी शोभा


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