! मेरी अभिव्यक्ति !

तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने, दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी . जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

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महंगाई तो महंगाई पर सबसे महंगी हमारी महत्वाकांक्षा

Posted On: 24 Jun, 2014 Others,social issues,Celebrity Writer में

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अभी और बढ़ेगी महंगाई

महंगे द‌िन: डीजल, रसोई गैस और केरोसिन के बढ़ेंगे दाम

अभी और बढ़ेगी महंगाई

डीजल के बाद सरकार रसोई गैस और केरोसिन के दाम बढ़ाने जा रही है।

रसोई गैस सिलेंडर की कीमत हर महीने पांच रुपये और केरोसिन के दाम प्रति लीटर पचास पैसे से एक रुपया तक बढ़ाने पर विचार हो रहा है ताकि इन दोनों ईंधनों पर 80,000 करोड़ की सब्सिडी धीरे-धीरे खत्म की जा सकी। [अमर उजाला से साभार ]

महंगाई तो मार ही गयी पर हमारी महत्वाकांक्षा  का क्या. आप सोच रहे होंगे कि  मैं फिर उलटी बात करने बैठ गयी.  समाचार पत्रों में गैस ,डीजल और केरोसिन के दाम बढ़ने की सूचना  प्रमुखता पा रही है .सरकार की जिम्मेदारी जनता जनार्दन के बजट की बेहतरी देखना है ये मैं मानती हूँ और यह भी मानती हूँ कि  सरकार इस कार्य में पूर्णतया विफल रही है किन्तु जहाँ तक सरकार की बात है उसे पूरी जनता को देखना होता है और एक स्थिति एक के लिए अच्छी तो एक के लिए बुरी भी हो सकती है किन्तु हम हैं जिन्हें केवल स्वयं को और अपने परिवार को देखना होता है और हम यह काम भी नहीं कर पाते.

आज जो यह महंगाई की स्थिति है इसके कहीं न कहीं हम भी जिम्मेदार हैं .मेरी इस सोच के पीछे जो वजह है वह यह है कि मैं देखती हूँ कि  हमारे क्षेत्र में जहाँ पैदल भी बहुत से कार्य किये जा सकते हैं लोग यदि सुबह को दूध लेने भी जाते हैं तो मोटर सायकिल पर बैठ कर जाते हैं जबकि वे  यदि सही ढंग से कार्य करें तो  मोर्निंग वाक के साथ दूध लाकर अपनी सेहत भी बना सकते हैं.सिर्फ यही नहीं कितने ही लोग ऐसे हैं जो सारे दिन अपने स्कूटर .कार को बेवजह दौडाए फिरते हैं .क्या इस तरह हम पेट्रोल का खर्चा नहीं बढ़ा  रहे और यह हमारी आने वाली पीढ़ी को भुगतना होगा जब उसे वापस साईकिल और बैलगाड़ी पर सवार होना होगा.

ये तो हुई छोटी जगह की बात अब यदि बड़े शहरों की बात करें तो वहां भी लोगों के ऑफिस एक तरफ होने के  बावजूद वे  सभी अलग अलग गाड़ी से जाते हैं और इस तरह पेट्रोल का खर्चा भी बढ़ता है और सड़कों पर वाहनों  की आवाजाही भी जो आज के समय में दुर्घटनाओं का मुख्य कारण है.

अब आते है गैस के मुद्दे पर जबसे गाड़ियाँ गैस से चलने लगी हैं लोगों का सिलेंडर घर में खर्च होने के साथ साथ गाड़ी में भी लगने लगा है और गैस की आपूर्ति पर भी इसका बहुत फर्क पड़ा है.अब बहुत सी बार घर में चूल्हा जलने के लिए गैस मिलना मुश्किल हो गया है और सरकार के द्वारा गाड़ी के लिए अलग सिलेंडर उपलब्ध करने के बजूद घरेलू गैस ही इस कार्य में इस्तेमाल हो रही है.क्योंकि गाड़ी के लिए मिलने वाले सिलेंडर घरेलू गैस के मुकाबले ज्यादा महंगे होते हैं.

हम हर कार्य में अपनी जिम्मेदारी से ये कहकर कि  ये सब हमारी जिम्मेदारी नहीं है अपना पल्ला नहीं झाड़ सकते क्योंकि हम भी इस सब के लिए उत्तरदायी हैं .आजकल ये स्थिति आ चुकी है कि  बच्चा पैदा बाद में होता है उसके हाथ में वाहन  पहले आ जाता है.व्यापार आरम्भ बाद में होता है और गोदाम में भण्डारण पहले आरम्भ हो जाता है क्या ये हमारी जिम्मेदारी नहीं है कि हम भी अपनी ऐसी आदतों पर अंकुश लगायें और देश में समस्याओं से निबटने में सरकार को सहयोग करें.

शालिनी कौशिक

[कौशल ]



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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
June 29, 2014

सकारात्मक आलेख के लिए बधाई !

rajanidurgesh के द्वारा
June 28, 2014

शालिनीजी , बहुत ही सही कहा आपने हम स्वयं भी जिम्मेवार है भौतिक वस्तुओं के हम गुलाम हो गए हैं आपकी लेखन सदा ही उत्कृष्ट रहता है बधाई

Shobha के द्वारा
June 26, 2014

ज्ञान वर्धक हित कारी लेख काश हम समझ सके इस लेख को पढ़ने के बाद इस पर अमल करंगे तभी यह सार्थक होगा मैं पहले से ही यह सब मानती हूँ शोभा


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