! मेरी अभिव्यक्ति !

तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने, दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी . जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

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जिंदगी की हैसियत

Posted On: 20 Jun, 2014 Others,कविता,Celebrity Writer में

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बात न ये दिल्लगी की ,न खलिश की है ,
जिंदगी की हैसियत मौत की दासी की है .

……………………………………………………
न कुछ लेकर आये हम ,न कुछ लेकर जायेंगें ,
फिर भी जमा खर्च में देह ज़ाया  की है .

………………………………………………..
पैदा किया किसी ने रहे साथ किसी के ,
रूहानी संबंधों की डोर हमसे बंधी है .

………………………………………………….
नाते नहीं होते हैं कभी पहले बाद में ,
खोया इन्हें तो रोने में आँखें तबाह की हैं.

……………………………………………………….
मौत के मुहं में समाती रोज़ दुनिया देखते ,
सोचते इस पर फ़तेह  हमने हासिल की है .

………………………………………………………….
जिंदगी गले लगा कर मौत से भागें सभी ,
मौके -बेमौके ”शालिनी”ने भी कोशिश ये की है .
………………………………………..

शालिनी कौशिक

[कौशल ]



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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
June 23, 2014

न कुछ लेकर आये हम ,न कुछ लेकर जायेंगें , फिर भी जमा खर्च में देह ज़ाया की है . जिंदगी की हकीक़त से रूबरू कर रही है रचना ,बधाई शालिनी जी .

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
June 22, 2014

शालिनी जी सुख को भोगो दुःख से लड़ो ,दूसरों के दुःख देखो तो तो अपने भूल जाओगी मौत एक सत्य है जिसके बाद नयी सुबह अवश्य आती है इसी कल्पना से चैन की नींद सो जाओ ओम शांति शांति जपो सब शांत हो जायेगा

    jlsingh के द्वारा
    June 22, 2014

    सहमत! पर, रचना बेजोड़!

rajanidurgesh के द्वारा
June 21, 2014

शालिनीजी , हार्दिक बधाई मौत के मुंह में समाती रोज़ दुनिया देखते सोचते इस पर फ़तेह हमने हासिल की है . अति भाव पूर्ण पंक्ति कविता अत्यंत ही सराहनीय


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