! मेरी अभिव्यक्ति !

तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने, दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी . जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

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नहीं इंसान के वश में .

Posted On: 16 Jun, 2014 Others,कविता,Celebrity Writer में

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आंसू पीकर मुस्कुराना ,नहीं इंसान के वश में ,
ठोकर खाकर हँसते जाना ,नहीं इंसान के वश में .
………………………………………………………………………………
संभलने की कोशिशें लाख ,भले ही हम यहाँ कर लें ,
ज़ख्म की टीस को सहना ,नहीं इंसान के वश में .
………………………………………………………………………
कलेजा हो रहा छलनी ,फरेब देख अपनों के ,
मगर खुलकर ये सब कहना ,नहीं इंसान के वश में .
…………………………………………………………………
हमारे जज़्बातों से खेलना ,फितरत में है जिनकी ,
उन्हीं के जैसे हो जाना ,नहीं इंसान के वश में .
……………………………………………………………..
बहाये जा यूँ ही आंसू ,यही है किस्मत ‘शालिनी ‘
कभी दुःख से निकल पाना ,नहीं इंसान के वश में .
………………………………………………………
शालिनी कौशिक
[कौशल ]



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sadguruji के द्वारा
June 21, 2014

बहाये जा यूँ ही आंसू ,यही है किस्मत ‘शालिनी ‘ कभी दुःख से निकल पाना ,नहीं इंसान के वश में ! बहुत भावपूर्ण ह्रदय के दर्द की अभिव्यक्ति ! आपको बधाई !

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
June 20, 2014

कलेजा हो रहा छलनी ,फरेब देख अपनों के , मगर खुलकर ये सब कहना ,नहीं इंसान के वश में .सुंदर पंक्तियाँ है ये ,बहुत दिनों बाद एक अच्छी रचना पढ़ने को मिली ,बधाई शालिनी जी .


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