! मेरी अभिव्यक्ति !

तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने, दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी . जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

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बेटी ऐसा जन्म न चाहे

Posted On: 5 Jun, 2014 social issues,कविता,Celebrity Writer में

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Your Pregnancy, Week by Week

हुआ है आज भी देखो

एक और क़त्ल

पर कहीं किसी चेहरे पर

विषाद की छाया नहीं !

…………………………………………………………………………………………………………………………………..

हर तरफ राहत

हो रही महसूस

जैसे किसी बहुत बड़ी

विपदा से मिली मुक्ति !

…………………………………………………………………………………………………………………………………..

कोई कह रहा

चलो सारे जीवन भर का बोझ हटा

कोई कह रहा

हज़ार झंझट दूर हो गए !

…………………………………………………………………………………………………………………………………..

देश का ,समाज का ,परिवार का

कितना हुआ भला

नहीं समझ पा रहे

बस पालन-पोषण,शिक्षा -दहेज़

के खर्च को बचाने में

खुद को सफल मान रहे !

…………………………………………………………………………………………………………………………………..

कन्या-भ्रूण हत्या का

स्वयं वह भ्रूण जो

जन्म न पा सका

मान रहा उपकार सभी का !

………………………………………………………………………………………………………………………………….

अच्छा किया जो मुझे ख़त्म कर दिया

लड़की होने के अभिशाप से

मुझको बचा लिया .

मैं बची लड़की होने के ताने से ,

लड़कों के अभद्र गानों से ,

अपनी इच्छाएं दबाने से ,

दहेज़ में जलाने से ,

…………………………………………………………………………………………………………………………………..

और समाज बचा

औरत की रखवाली से ,

उसको मिलती गाली से ,

बलात्कार बीमारी से ,

लुटती पिटती नारी से !

…………………………………………………………………………………………………………………………………..

देश भी देगा तुम्हें दुआएं ,

जनसँख्या न अब बढ़ पाये ,

बेटी कल को माँ ही बनती ,

बेटी नहीं तो दूर बलायें ,

जनसँख्या जब थम जाएगी ,

तभी तरक्की मिल पायेगी .

………………………………………………………………………………………………………………………………….

देश ,समाज ,परिवार तुम्हारा रहे कृतज्ञ सदा कातिलों ,

बेटी ऐसा जन्म न चाहे जिसमे जीवन ही न मिलो .

………………………………………………….

शालिनी कौशिक

[कौशल ]


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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Jaynit Kumar के द्वारा
June 8, 2014

समाज को आईना दिखाती रचना..

sadguruji के द्वारा
June 8, 2014

सार्थक और बहुत शिक्षाप्रद रचना ! आप को बधाई !

nishamittal के द्वारा
June 6, 2014

सार्थक,मामिक रचना शालिनी जी

Shobha के द्वारा
June 5, 2014

आपकी कविता पढ़ कर न जाने क्यों आत्मा काप गई आज की बेटी अपने माँ बाप का ध्यान बेटे से अधिक रखती हैं धीरे- धीरे सब समझ जायेगे दर्द से भरी कविता शोभा

jlsingh के द्वारा
June 5, 2014

देश ,समाज ,परिवार तुम्हारा रहे कृतज्ञ सदा कातिलों , बेटी ऐसा जन्म न चाहे जिसमे जीवन ही न मिलो . बहुत गहराई में उतरकर आपने एक अजन्मी बेटी की भावना को व्यक्त किया है. अब तो एक महिला जज भी अछूती न रही. ऐसे में बेटी का जन्म न लेना ही श्रेयष्कर है कालिदास की उपमा के न अब जरूरत है, सृष्टि की नियंता की अब नहीं जरूरत है. दूर्गा, लक्ष्मी, शारदा सी देवियों से हीं धरा, पुरुष पुरुष को मारे देखें कितनी कूबत है? सादर!

    PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
    June 8, 2014

    जवाहर जी मनुष्य इतना भयभीत हो चूका है कि वास्तव मै आपके विचार से ही संतो ष होता है भावनाओ मै बहना दुखो का कारण वनता है यही विचार पनपता है कमजोर मनुष्रय मै 


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