! मेरी अभिव्यक्ति !

तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने, दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी . जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

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ये जिंदा थे ,जिंदा हैं और जिंदा रहेंगे .

Posted On: 3 Jun, 2014 Others,कविता,Celebrity Writer में

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चले आज वे महज़ देह छोड़कर ,

नज़र सामने न कभी आयेंगे .

अगर देखें शीश उठाकर सभी ,

गगन में खड़े वे चमक जायेंगे .

शरीरों का साथ भी क्या साथ है ?

है चलती ही रहती मिलन व् जुदाई .

जो मिलते हैं अपनी आत्मा से हमें

न मध्य में आती किसी से विदाई .


ये जन -जन के प्यारे अज़र  हैं अमर हैं

हमारे ख्वाबों में रोज़ आया करेंगे .

भले भूल जाएँ हमको हमारे ही अपने

ये सबके दिलों पर छाये रहेंगे .

जो पैदा हुए हैं सभी वे मरेंगे ,

जो आये यहाँ पर सभी चल पड़ेंगे .

है इनके काम का ये जादू सभी पर

ये जिंदा थे ,जिंदा हैं और जिंदा रहेंगे .


श्री गोपीनाथ  मुंडे को भावपूर्ण श्रृद्धांजलि


शालिनी  कौशिक



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
June 4, 2014

जो मिलते हैं अपनी आत्मा से हमें न मध्य में आती किसी से विदाई ,सबसे बड़ा जीवन दर्शन लिखा है आपने शालिनी जी ,जो लोग स्म्रतियों में सदैव जीवित रहते हैं वो अमर होते हैं ,श्री गोपी नाथ मुंडे उनमे से एक हैं भगवान उनके परिजनों को उनके बिछोह का दुःख सहने की क्षमता दे .

Neha Verma के द्वारा
June 3, 2014

सार्थक अभिव्यक्ति शालिनी जी…


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