! मेरी अभिव्यक्ति !

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पुष्पों का गुंचा खिलता है.

Posted On: 3 Jun, 2014 Others,कविता,Celebrity Writer में

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कुदरत का करिश्मा देखो हर बगिया में खिलता है,

प्रतिदिन खुशियाँ देने को पुष्पों का गुंचा खिलता है.

सुबह सुबह जब हम बगिया में टहलने हैं जाते ,

खिले खिले कितने गुलाब हैं हमको हाथ हिलाते,

देख इन्हें हँसते मुस्काते आनंद पूरा मिलता है,

प्रतिदिन खुशियाँ देने को पुष्पों का गुंचा खिलता है.

रात के राजा के फूलों की अज़ब बात है भाई,

रात को श्वेत खिलते हैं सुबह को लालिमा छाई,

इनकी खुशबू से सारा संसार सुगन्धित होता है,

प्रतिदिन खुशियाँ देने को पुष्पों का गुंचा खिलता है.

बगन बलिया की बेल पर लक दक पुष्प हैं छाये,

इन्हें तोड़ने सुबह शाम को भक्तगण हैं आये,

खुशबू न होकर भी इनमे प्रभु चरणों में चढ़ता है,

प्रतिदिन खुशियाँ देने को पुष्पों का गुंचा खिलता है.

सर्दी के मौसम में बगिया गैंदे से भर जाये,

नारंगी रंगों से रंग मेरे घर रौनक छाये,

सुबह शाम खिल खिलाना इनका मन में खुशियाँ भरता है,

प्रतिदिन खुशियाँ देने को पुष्पों का गुंचा खिलता है.


शालिनी कौशिक






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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sadguruji के द्वारा
June 5, 2014

आदरणीया शालिनी कौशिक जी ! सादर अभिनन्दन ! बहुत सुन्दर और सहज भाव से लिखी गई कविता ! बहुत बहुत बधाई ! ये पंक्तियाँ मुझे अपने यहाँ के फूलों की याद दिला दीं-सुबह सुबह जब हम बगिया में टहलने हैं जाते , खिले खिले कितने गुलाब हैं हमको हाथ हिलाते, देख इन्हें हँसते मुस्काते आनंद पूरा मिलता है, प्रतिदिन खुशियाँ देने को पुष्पों का गुंचा खिलता है.

अहा! सुंदर पुष्पों के गुंचे सी महकती कविता..बधाई..सादर..

Shobha के द्वारा
June 3, 2014

बहूत अच्छी कविता पर्यावरण से जुड़ी कविता शोभा


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