! मेरी अभिव्यक्ति !

तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने, दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी . जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

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बीवी -डिबली की लौ -एक लघु कथा

Posted On: 28 May, 2014 Others,social issues,Celebrity Writer में

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औरत के नाम में संपत्ति लेने पर स्टाम्प शुल्क में कमी हो जाती है दामोदर ने ये सोचा और झोपडी में रह रही अपनी बीवी को गाड़ी में बैठाकर रजिस्ट्री कार्यालय ले गया और बीवी के नाम में नई कोठी का बैनामा ले लिया .
दामोदर की नई कोठी में आज पार्टी थी .इसी शहर के ही नहीं बड़े-बड़े शहरों के बड़े-बड़े लोग इस भव्य शानदार पार्टी में मौजूद थे .शराब कॉफी सब चल रही थी तभी एक बोला ,”भई! ये कोठी तो दामोदर ने बीवी के नाम पर ली थी उसे नहीं बुलाया ?”…अरे ! उसके ऐसे भाग्य कहाँ जो दामोदर जैसे आत्ममुग्ध चतुर चालाक शिकारी के साथ रह सके,वह तो डिबली की लौ है और इसलिए झोपडी में ही जलती है ”……रवि के ऐसा कहते ही सारे दोस्त ठहाका लगाकर हंस पड़े और दामोदर हाथ बांधे उनकी बात सुन मुस्कुराता रहा .

शालिनी कौशिक
[कौशल ]



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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
May 28, 2014

खूबसूरत व्यंग सच्चाई से भरपूर शोभा


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