! मेरी अभिव्यक्ति !

तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने, दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी . जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

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कल्पना /यथार्थ

Posted On: 1 May, 2014 social issues,कविता,Celebrity Writer में

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उड़ता है मन
कल्पनाओं के
रोज़ नए लोक में ,
पाता है नित नयी
ऊंचाइयां
तैरकर के सोचता
पाउँगा इच्छित सभी,
पूरी आकांक्षाएं
होंगी मेरी अभी ,
तभी लगे हैं ठोकरें
यथार्थ से जो पाँव में
टुकड़े टुकड़े हो ह्रदय
घिरता जाये शोक में .
………….
शालिनी कौशिक
[कौशल ]



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Neha Verma के द्वारा
May 2, 2014

सुन्दर अभिव्यक्ति शालिनी जी… :)

sanjay kumar garg के द्वारा
May 2, 2014

मन की दशा का सटीक विश्लेषण! आदरणीया शालिनी ji!


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