! मेरी अभिव्यक्ति !

तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने, दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी . जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

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मोदी सरकार मतलब तानाशाही सरकार

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भाजपा का २०१४ के लोकसभा चुनाव के लिए जारी होने वाला घोषणा पत्र अभी टल गया. अब ७ अप्रैल को घोषित किया जायेगा .कारण ” मोदी ” के हस्ताक्षर नहीं हुए .मोदी कौन ? भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार ,जहाँ तक उनकी सोच को इसमें स्थान मिलने की बात है वहाँ तक उनकी आँखों के नीचे से इसका गुज़रना सही कहा जायेगा किन्तु मोदी के हस्ताक्षर ज़रूरी क्यूँ जबकि ये घोषणापत्र भाजपा का है और उनकी स्थिति मात्र भाजपा के एक सिपाही की है या फिर ज्यादा से ज्यादा सेनानायक की और युद्ध की घोषणा और उसके बाद किये जाने वाले कार्यक्रमों की घोषणा राजा द्वारा की जाती है और भाजपा के राजा इस वक़्त जहाँ तक हम सभी जानते हैं राजनाथ सिंह जी हैं और वे स्वयं को लोकतान्त्रिक कहने वाली पार्टी में लोकतान्त्रिक तरीके से ही चुने गए हैं और जब वे उपस्थित है तो ये अधिकार उनका है और यदि ऐसे में यह अधिकार कोई और प्रयोग कर रहा है तो साफ है कि भाजपा की लोकतान्त्रिक राजशाही खतरे में है .सारे में अच्छे दिन आने की बाते कही जा रही हैं और अच्छे दिन लाने वाली पार्टी के लगता है बुरे दिन आ गए हैं .”मैं नहीं हम” का दावा करने वाले मोदी के बारे में चारों ओर यही चर्चा है कि उन्होंने भाजपा को हाइजेक कर लिया है और इसमें कुछ भी असत्य नहीं लगता क्योंकि वोट देने की बात तो भाजपा सरकार को कही जा रही है और सरकार मोदी की बनेगी ये दिखाया जा रहा है क्या समझ में आता है इससे ,यही कि भाजपा और कमल का फूल मात्र नाम व् चिन्ह रह गए हैं और झंडा हो या डंडा सब कुछ मोदी ही हो गए हैं .मुरली मनोहर ,हरेन पंड्या ,लाल कृष्ण सभी की बोलती बंद हो चुकी है अब बस एक की ही टूटी बोलती है मोदी की जिसे वे चाहेंगे वह चुनाव लड़ेगा ,जब वे साइन करेंगे तब घोषणा पत्र ज़ारी होगा ,सरकार उनकी बनेगी ,विज्ञापन उन्हीं के होंगे दूरदर्शन पर आने वाले सभी विज्ञापन जिसमे ”जनता माफ़ नहीं करेगी ”कहते कहते जनता को अभिनेता /अभिनेत्रियां भावुक कर भाजपा को वोट देने को तैयार कर रहे थे वे सब अब साफ हो गए हैं और अब आ गए हैं नए विज्ञापन जिनमे मोदी जी खुद अपनी सरकार का विज्ञापन कर रहे हैं मतलब हम कहते कहते मैं पर लौट रहे हैं मोदी ,कोई मेरी बात का बुरा माने या भला किन्तु यदि दिमाग से सोचेगा तो निश्चित रूप में उसे मोदी तानाशाही की ओर बढ़ते हुए ही दिखाई देंगे जहाँ अन्य किसी के लिए कोई स्थान नहीं ,अन्य किसी का कोई भरोसा नहीं अन्य किसी पर निर्भरता नहीं .अब वे ही सब कुछ हो चुके हैं क्या मतलब निकलता है इसका
”मैं अकेला ही चला था जानिबे मंज़िल मगर
लोग साथ आते गए कारवां बनता गया ”
तो बिलकुल नहीं ,अब मोदी साफ साफ तानाशाही की ओर बढ़ रहे हैं और एक ऐसी सरकार जिसका सब कुछ मात्र एक ही व्यक्ति हो वह तानाशाही की सरकार कही जाती है और वह सबसे मात्र यही कहती है -
” मेरी मर्ज़ी ,मैं चाहे ये करूँ मैं चाहे वो करूँ मेरी मर्ज़ी .”
अब हमें लोकतंत्र में रहना है या तानशाही में ये हम सभी पर ही निर्भर है .एक बार सोचियेगा ज़रूर .


शालिनी कौशिक
[कौशल ]



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8 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

RAJEEV GUPTA के द्वारा
April 10, 2014

आपका लेख अच्छा है -मोदी इस समय सिर्फ देश की ही नहीं भाजपा की भी जरूरत बन गए है -आपने जो मुद्दे उठाये है ,वे अपनी जगह सही हैं लेकिन कांग्रेस या फिर सपा /बसपा जैसी पार्टियों से छुटकारा पाने का और कोई रास्ता जनता को दिख नहीं रहा है !

Durgesh Kumar के द्वारा
April 8, 2014

दोस्तों वैसे सभी लोगो कि अपनी अपनी सोच होती है और उसे बदलना इतना आसान नही होता , चलो में आपकी बात मानलु 1 मिनट के लिए तो आप ही बताइये किसकी सरकार आनी चाहिए :- १ : कांग्रेस जो १० साल से राज कर रही है और मनमोहन जैसा PM दिया जो किसी काम का नही , जिसमे न जाने कितने घोटाले हुए , कितने दंगे हुए , कितनी महगाई हुयी, कितने बलात्कार हुए , कितने फोजियो के सर कट गए, इमाम बुखारी जिस के खिलाफ नॉन जमानती वारंट है खुले घूम रहे है और संत महात्माओ पर जोर दिखाया जा रहा है , हर दिन पनडुब्बियों में विस्फोट होता है, देश चीन के सामने कमजोर पड़ गया है …. अगर में लिखना सुरु करदु तो ख़त्म ही नही होगा etc . २. आम आदमी पार्टी जो लड़ाई में दूर दूर तक नही है . ३. सपा , बसपा etc जो सिर्फ muslims या कुछ लिमिटेड वर्ग के बारे में सोचते है. दोस्तों लोग सोचते है कि मोदी के आने से दंगे होंगे वो लोगो को मरवाएगा , लेकिन ऐसा नही होगा क्योंकि : १. दंगे तब होते है जब totally मुस्लिम्स supported govt (like SP, BSP, Congress etc ) आती है . आप history उठा लेना 99.99 % दंगे मुस्लिम सुरु करते है न कि हिन्दू . 2. अगर बात विकास कि जाये तो गुजरात के विकास कि पूरी दुनिया मुरीद है . ३. चुनाव हर 5 साल में आते है , अगर मोदी का काम अच्छा न लगे तो फिर वोट पड़ेंगी, ये तो नही है कि फिर कभी चुनाव नही होंगे . जब ham ६० साल कांग्रेस को दे सकते है तो सिर्फ ६० महीने ही तो मोदी मांग रहा है. और में अपनी बात ख़त्म करते हुए ये कहना चाह रहा हूँ कि , तानाशाही वहा होती है जहाँ लोकतान्त्रिक प्रजातंत्र नही होता . भारत १ ऐसा देश है जहाँ सरकार हर 5 साल में चुनी जाती है, और सरकार के ऊपर राष्ट्रपति , surpeem कोर्ट बैठे है , तो तानाशाही का तो सवाल ही पैदा नही होता . इस बार vote for change…………. vote for Modi………… !! 1 बार सेवा का मौका जरुर दें . आपकी वोट आपकी सरकार … मोदी सरकार !! धन्यवाद !

    April 8, 2014

    आप खुराना जी की टिप्प्णी पढ़ लें .आपको जवाब मिल जायेगा .प्रतिक्रिया हेतु धन्यवाद् .

R K KHURANA के द्वारा
April 8, 2014

प्रिय शालिनी जी, कृप्या इन बिन्दुओं पर ध्यान दें और पूरी जांच करनें के बाद ही अपना वोट डालें। • गुजरात में अमित जेठवा जैसे RTI कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी जाती है, जिसमें भाजपा के नेताओं के नाम स्पष्ट रुप से शामिल हैं। • गुजरात में 10 साल तक लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं की गई। जब राज्यपाल ने लोकायुक्त को नियुक्ति किया तो राज्य सरकार ने इसको किसी भी तरह से रोकने के लिए मुक्द्दमें में 45 करोड़ खर्च किए। • Supreme Court ने गुजरात सरकार की मंत्री आनंदी बेन पटेल को एक जमीन आवंटन के मामले में दोषी पाया पर वो आज भी गुजरात सरकार में मंत्री बनी हुई हैं। • 400 करोंड़ के मछली पालन घोटाले में कोर्ट द्वारा दोषी पाए गए पुरुषोत्तम सोलंकी गुजरात मंत्रीमंडल को आज भी सुशोभित कर रहे हैं। • भ्रष्टाचार के मामले में जेल यात्रा कर चुके यदुरप्पा को भाजपा पार्टी में फिर शामिल किया। चुनाव के शोर में सच कई बार सुनाई नहीं देता खासकर जब शोर करने वाला झूठ बोलने में माहिर हो। राम कृष्ण खुराना

s.p. singh के द्वारा
April 8, 2014

शालिनी जी बेबाक लिखने के लिए बधाई – बोलने वाले तो अनर्गल बालेंगे ही – मिस्टर धीर चौहान, कृपया अपनी भाषा शैली पर ही ध्यान दीजिये. किशी भोपूं कि तरह बजने का कार्य न कीजिये आपको अपने विचार लिखने कहने करने का पूरा अधिकार है तो अपना ब्लॉग क्यों नहीं लिखते किसी किराये के टट्टू कि तरह भड़ास निकलने से कुछ नहीं होने वाला , आभी एक माह के बाद सबकुछ साफ़ हो जायेगा – कृपया यही बता दीजिये के एक चाय वाला अपने प्रचार और आत्म गाथा के लिए हजारों करोड़ रुपया किस के घर से लेकर आया है किसी चाय वाले के पास इतना धन तो हो नहीं सकता -

    Kartik Kumar Jha के द्वारा
    April 10, 2014

    जनाब एस0पी सिंह जी, आप मिस्‍टर धीर चौहान को अपने भाषा शैली सुधारने की सलाह देते हैं, लेकिन आपकी भाषा शैली भी मिस्‍टर धीर चौहान से एक लग्‍गा आगे है। शालिनी कौशिक जी को अपना विचार व्‍यक्‍त करने का पूरा हक है और वे विचार व्‍यक्‍त भी कर रही है। अच्‍छा है । मेरा अनुरोध है कि आप एक विद्वान व्‍यक्ति होने के नाते संयमित भाषा का प्रयोग करें तो अच्‍छा रहेगा

dhirchauhan72 के द्वारा
April 7, 2014

एक अनपढ़ पप्पू जिसे ये नहीं पता देश क्या होता है …समाज किसे कहते है …गरीबी क्या होती है …और आज तो सुब्रमणियम स्वामी ने चेलेंज किया है कि अपना नामांकन फ़ार्म भर के दिखाए दे राजनीति छोड़ देंगे ! उसके चाहने वालों का दुःख देख कर अजीब लगता है ! बात तकलीफ देने वाली हो सकती है क्योंकि कोई काम जानता नहीं …पड़ा लिखा है नहीं कोई नौकरी भी नहीं कर सकता चोरी के पैसों से घर तो चल जाएगा लेकिन बिना राजनितिक ताकत के कोई गलत काम तो किया नहीं जा सकता जीजाजी को कैसे तबेले से निकाल कर एक बिजनेसमेन बना दिया ये भी सम्भव नहीं है अगर मोदी आ गया तो स्विस बैंक के खाते भी न खोल दिए जाएँ ……..ये सब छोड़िये शालिनी जी आप अपना राग विलाप रटिये देश को और भी आगे जाना है कोई खरीद नहीं लिया है इन चोरों ने !

    April 7, 2014

    dheer chauhan ji pahle to aap rahul ji ko lekar apni bhasha me sudhar kijiye aapko ya poore desh me kisi ko bhi unki shiksha par sawal उठाने ka hak nahi hai ve is waqt rajneeti me hain aur yahan kisi shiksha kee koi aavshyakta nahi hai aur subramaniyam swami koi bhagwan nahi hain ki rahul unka kaha karte rahen aur modi ji ke pathgami bante hue unhen naukri ke liye चुनोती न दें और आप जो भी हैं अगर सही तरीके में अपनी प्रतिक्रिया नहीं दे सकते हैं तो न दें क्योंकि सभी की अपनी अपनी पसंद हैं और उसे कोई नहीं पलट सकता .धन्यवाद्


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