! मेरी अभिव्यक्ति !

तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने, दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी . जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

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बस एक ही मुद्दा-राहुल-सोनिया

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”युवाओं को बेरोजगार रखने वालों जनता माफ़ नहीं करेगी .हमारी बेटियों को सुरक्षा न देने वालों जनता माफ़ नहीं करेगी ,महंगाई बढ़ने वालों जनता माफ़ नहीं करेगी ,बिजली के लिए तरसाने वालों जनता माफ़ नहीं करेगी ,”मोदी सरकार के लिए वोट करने की अपील करने वाले ये विज्ञापन जिन मुद्दों के लिए जनता का क्रोध दर्शा रहे हैं उनसे ये तो साफ ही है कि न तो जनता भ्रष्टाचार से त्रस्त है और न ही इन विज्ञापनों से मोदी सरकार को कोई सरोकार है .
भ्रष्टाचार जिसके लिए आज तक यू.पी.ए.सरकार पर निरंतर हमले हुए और जिसके कारण दिल्ली में आम आदमी पार्टी ने सरकार बना ली ,देखा जाये तो वास्तव में कभी सत्ता हथियाने का मुद्दा बन ही नहीं सकता और क्योंकि आम आदमी पार्टी भ्रष्टाचार मिटाने के दम पर सत्ता में आयी थी और उसका शासन कितना सफल रहा यह भी सबने देखा ,पहले तो वह ही मात्र ४९ दिन में अपने असफल मुद्दे की पूंछ पकड़कर भाग गयी दूसरे उसके लिए आगे सत्ता के लिए खुलने वाले सभी रस्ते हमेशा के लिए बंद हो गए क्योंकि ये हमारा देश गाँव में बसता है और गावों में भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे को कभी कोई स्थान नहीं मिल सकता क्योंकि गावों के मुद्दे राजनीति में हमेशा से जाति-धर्म व् खेती ही रहे हैं बिजली चूँकि खेती के लिए पानी का जरिया है इसलिए वह गाँव वाले अपने दमपर हासिल करते हैं और बेटियों की सुरक्षा वे स्वयं लट्ठ के बल पर करते हैं इसके लिए किसी राजनीतिक दल की ओर नहीं देखते .इसलिए जाति-धर्म व् खेती जैसे मुद्दों का फायदा उठाकर ही आज तक सरकारें बनती आयी है .शहर वाले एक बार को भ्रष्टाचार से त्रस्त होकर नए की पहल कर सकते हैं किन्तु गाँव में भ्रष्टाचार की बात प्रभावी नहीं क्योंकि ये तो पहले ही स्वयं तरकीब भिड़ाकर कार्य निकालने वाले होते हैं .इनका कहना होता है ”कि जैसे भी हो अपना काम होना चाहिए ” और इसलिए ये खुद भी भ्रष्टाचार को बढ़ावा ही देने वाले होते हैं इसलिए दिल्ली जैसी जगह में भ्रष्टाचार के नाम पर भीड़ जुटाने वाले अन्ना भी यदि गावों में इसके लिए समर्थन जुटाने की कोशिश करें तो पहले उनकी जाति-धर्म ही देखा जायेगा और यही बात भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार मोदी जी [इतना लम्बा ही परिचय देना होगा क्योंकि आज तक भी लहर के बावजूद मोदी जी की कोई पहचान नहीं है इसके सिवा इसलिए दूरदर्शन पर और अन्य चैनल पर भी इनसे सम्बंधित समाचार देने के लिए पहले इतना लम्बा परिचय देना ही पड़ता है जैसे अलीबाबा और चालीस चोर ]ने पकड़ ली और अपने को कभी चाय वाला तो कभी पिछड़ा कहकर भी प्रचारित किया जो कि आज और सब भी कर रहे हैं उनके द्वारा स्वयं इस स्वीकारोक्ति से पहले हम नहीं जानते थे कि वे पिछड़े हैं अब जान गए और ये उन्हें करना ही था जैसे कि आज वैसे तो अपने नाम के आगे उपनाम में कभी कुमार व् कभी देवी लिखते हैं क्योंकि अपने पिछड़ेपन से शायद शर्म आती है किन्तु जब सरकारी फायदे की बात आती है तो शर्म नमक कीड़ा छूमंतर फ़ौरन उसका प्रमाण पत्र बनवाने चल देते हैं ऐसे ही मोदी जी को इस वक़्त अपना पिछड़े होना फायदे का सौदा लगा और इसे प्रचारित करने लगे क्योंकि वे जानते हैं कि आज भी चाय का व्यवसाय अधिकांश वे ही जातियां कर रही हैं जो किसी न किसी तरह से पिछड़ी हुई हैं और चाय वैसे भी आज गरीबों का मुख्य पेय पदार्थ है ऐसे में चाय वाला कहलाकर मोदी जी का दोनों हाथ घी में और सिर कढ़ाई में ही रहने वाला है और इसलिए भाजपा को भी पिछड़ों की ही पार्टी कहना शुरू करा दिया जिसे कभी बनियों ब्राह्मणों की पार्टी कहा जाता था किन्तु मोदी ये भी जानते हैं कि आज दलितों -पिछड़ों की खैरख्वाह बहुत सी पार्टियां हैं और देश में अगर कोई मुद्दा सदाबहार है और किसी के दमपर यदि रातों रात प्रसिद्द हुआ जा सकता है तो वह नेहरू गांधी परिवार पर व्यक्तिगत हमले क्योंकि देश की जनता में अगर किसी परिवार का क्रेज़ है तो वह है इस परिवार का ,अगर किसी परिवार के बारे में जानने को वह अपनी रातों को जागकर बिता सकती है तो वह है नेहरू गांधी परिवार ,ऐसे में बेटियों की सुरक्षा ,महंगाई ,बिजली ,पानी ,जाति धर्म इनके लिए क्या महत्व रखते हैं ये कोई बच्चा भी जान सकता है और बेटियों या महिलाओं का इनकी स्वयं की नज़र में और इनकी पार्टी की नज़र में क्या महत्व है यह भाजपा के एक राजस्थानी नेता ने सोनिया गांधी व् ऱाहुल गांधी पर अपनी अभद्र टिप्पणी से बता ही दिया है और उसपर भाजपा और मोदी दोनों की ही तरफ से कोई अफ़सोस तक ज़ाहिर नहीं किया गया जबकि इन्ही के विज्ञापन में मोदी को लाने की अपील करने वाली नारी अपनी बेटी की सुरक्षा इनके कंधे सौंपने की बात कहती है शायद वह खुद भी नहीं जानती कि जिसकी सरकार लाने की वह बात कर रही है वह कॉंग्रेस को ख़त्म करने की बात तो करता है किन्तु उसके मन मस्तिष्क पर बस सोनिया -राहुल ही हावी हैं और वह किसी और मुद्दे को अपनी ज़बान देने की बजाय बस ”शहजादे और माता श्री ” ही रटता रहता है .
ऐसे में भला ये कैसे माना जा सकता है कि देश में कोई और मुद्दा है ?जिस चुनाव में एक मात्र प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के अनुसार जनता ने स्वयं पहली बार चुनाव परिणाम तय कर लिए हैं ,कॉंग्रेस किसी भी राज्य में दोहरे अंक में सीट नहीं मिलेगी ,सभी मोदी की ताजपोशी के इंतज़ार में हैं ,भ्रष्टाचार या अन्य किसी मुद्दे का मोदी से ऊपर कोई स्थान नहीं है तब जब हम सभी मोदी लहर में बहे जा रहे हैं तो ये लहर ही क्यूँ बार बार कांपती हुई सी शहजादे -माता श्री पर कंपायमान सी हो जाती है कहीं इस लहर से ऊपर भी कुछ और तो नहीं ,कहीं वही तो नहीं जिसके बार बार दोहराकर मोदी लहर बही जा रही है सच्चाई तो बस यही कही जा सकती है इस रटन पर -
”कैंची से चिरागों की लौ काटने वालों ,
सूरज की तपिश को रोक नहीं सकते .
तुम फूल को चुटकी से मसल सकते हो
पर फूल की खुश्बू समेट नहीं सकते .”

जागरण जंक्शन में २ अप्रैल २०१४ को प्रकाशित

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शालिनी कौशिक
[कौशल ]



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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

brijeshprasad के द्वारा
April 2, 2014

आप की टिप्प्णी “भ्रस्टाचार एक मुद्दा” पढ़ा। मै आप से किसी हद तक इतिफाक रखता हूँ। मेरे विचार से देश में भ्रस्टाचार अपना पूरा – पूरा प्रभाव बना चूका है,और भाविष्य में यह अपनी पराकास्ठा पार करता दिखेगा – जिस के रूप की किसी एक सीमा के अंदर कल्पना नही की जा सकती। भ्रस्टाचार को हम भोजन में – जैसे नमक का महत्व होता है, ठीक उसी रूप में यह सारे समाज में ब्याप्त है , वह शहर हो अथवा गांव या फिर कुछ और। वर्त्तमान में देश में इसके बिना जीवन ही रसहीन हो चुका है।लेकिन ज्यों – ज्यों इस की मात्रा बढ़ती जा रही है – इस से मिलनेवाला स्वाद भी कुटिल होता जा रहा है। लोग अब मजबूर है इसे ग्रहण करने को। जल्द ही समय आने वाला है,जब इस की (नमक ) अधिकता यवम निरंतरता के दुष्परिणाम शरीर को किसी असाध्य रोग से ग्रसित कर देंगे,इस अवस्था में इस रोग की आंशिक चिकत्सा शैल क्रिया द्वारा शायद सम्भव हो सके अथवा केवल मृतु ही इस का परिणाम हो। अतः भ्रस्टाचार एक अत्यंत ही गम्भीर मुद्दा है। इस पर अंकुश लगते ही, देश का उत्थान स्वतः ही होने लगेगा, बिना किसी अतरिक्त संसाधनों के ही। तात्पर्य है, भेजे गए 100 /- जब अपने गंतब्य तक 80 /- ही पहुँच जायेंगे, तो भारत को ‘सोने की चिड़िया’ होने से कोइ भी नहीं सकेगा।

jlsingh के द्वारा
April 1, 2014

”कैंची से चिरागों की लौ काटने वालों , सूरज की तपिश को रोक नहीं सकते . तुम फूल को चुटकी से मसल सकते हो पर फूल की खुश्बू समेट नहीं सकते .” वाह! वाह! अगर मोदी लहर, मोदी अंधी और मोदी सुनामी है तो क्यों रोज नए नए समझौते किये जा रहे हैं? मोदी जी क्यों पानी पी पी कर चिल्लाये जा रहे हैं?


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