! मेरी अभिव्यक्ति !

तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने, दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी . जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

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मंज़िल मिलेगी अवश्य .

Posted On: 18 Mar, 2014 social issues,कविता,Celebrity Writer में

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प्रतीक्षा

धैर्य

विश्वास

मंज़िल मिलेगी अवश्य !

भगवान

के कर्म

मनुष्य की भलाई

हर काम

हर बात

का समय निश्चित

फिर कर्म की

पुण्य की

क्या महत्ता ?

जीवन की

दशा

दिशा

भाग्य पर निर्भर,

भाग्य

प्रारब्ध का फल !

इस जन्म के कर्म

अगले जन्म का

भाग्य !

मोक्ष

उस आत्मा को

जो

पाप-पुण्य से परे !

मोक्ष की आकांक्षा

की

गयी

आत्मा फिर

घिरी

पाप-पुण्य के जाल में ,

फिर

चाहत से

कुछ नहीं

अनचाहा मन

रहे नहीं ,

रहे मात्र

प्रतीक्षा

धैर्य

विश्वास

मंज़िल मिलेगी अवश्य .

……………………..

शालिनी कौशिक

[कौशल ]



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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

vaidya surenderpal के द्वारा
March 25, 2014

सुंदर कविता……., बधाई।

Ritu Gupta के द्वारा
March 19, 2014

सुंदर सोच लिए अच्छी कविता बधाई शालिनीजी

deepak bisht के द्वारा
March 19, 2014

मोक्ष उस आत्मा को जो पाप-पुण्य से परे ! मोक्ष की आकांक्षा की गयी आत्मा फिर घिरी पाप-पुण्य के जाल में , सुन्दर ! अभिव्यक्ति शलिनी जी!

sanjay kumar garg के द्वारा
March 19, 2014

“प्रारब्ध का फल इस जन्म के कर्म अगले जन्म का भाग्य !” आदरणीया शालिनी जी, सुन्दर अभिव्यक्ति!

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
March 18, 2014

आपने कविता में जीवन दर्शन प्रस्तुत कर दिया शालिनी जी ,प्रतीक्षा ,धैर्य ,विश्वास ,मंजिल मिलेगी अवश्य .ज़िन्दगी वास्तव में पहेली ही है ,विचारोत्तेजक ,अनूठी प्रस्तुति ,सादर बधाई .


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