! मेरी अभिव्यक्ति !

तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने, दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी . जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

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बाज़ार बन चुका मीडिया

Posted On: 17 Mar, 2014 Others,कविता,Celebrity Writer में

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मीडिया

लोकतंत्र की पहचान

जनता का हथियार

सत्य

सर्वत्र प्रसारित हो

सब हर सच से परिचित हों

कर्त्तव्य परम

किन्तु पथभ्रष्ट हुआ

भटका ये स्तम्भ

समाचारों का प्रकाशन

प्रचार  प्रसार

मात्र

चंद रुपयों में

संविदा आधारित व्यापार

बनी आज सत्य पथ पर चलने की

प्रतिज्ञा

प्राप्त जहाँ से ठेका,विज्ञापन

बढ़ा रहा उसे आगे

बता रहा उसे सही

फिर

कहाँ गया विश्वास

सत्य ला रहा ये

किस पर करें भरोसा

जब असत्य कह रहा ये

फिर

कैसी ये पहचान लोकतंत्र की

कैसा ये हथियार जनता का

आज मात्र

बाज़ार बन चुका

मीडिया

जहाँ बिक रहा है

प्रचार ,प्रसार,समाचार।

शालिनी कौशिक

[कौशल ]



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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

vaidya surenderpal के द्वारा
March 23, 2014

सुन्दर सार्थक कविता के लिए हार्दिक बधाई शालिनी कौशिक जी।

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
March 23, 2014

 शालिनी जी मीडिया व्यापार ही है  जिसमैं धन लगाकर धन कमाया जाये उत्तम अनुभूती ओम शांति शांति 

Ritu Gupta के द्वारा
March 17, 2014

आपने सच्च कहा शालिनी जी यह मडिया अमीरो के हाथो कि अठपुतली बन चूका है जैसे वो घुमाते वैसे ही घूमता है सच्च को बयान करती सुंदर कविता होली मुबारक हो आपको


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