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दूरदर्शन :सरस्वतीचंद्र को पुराना स्थान दे .

Posted On: 9 Mar, 2014 Others,Junction Forum,Celebrity Writer में

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दूरदर्शन विश्वास का दूसरा नाम कहा जाता है किन्तु अगर अब हम ये कहें कि दूरदर्शन तानाशाह है तो अतिश्योक्ति नहीं होगी .ये तानाशाही ही है कि जब चाहे कोई कार्यक्रम दर्शकों पर थोप दिया और जब चाहे किसी कार्यक्रम से दर्शकों को वंचित कर दिया .
* ”आँखों देखी ”दूरदर्शन के न्यूज़ चैंनल पर रात को साढ़े दस बजे आता था अचानक दूरदर्शन के दिमाग में आया
कि इसे साढ़े ग्यारह बजे कर दो तो उठाया और इसे और वहाँ पटक दिया .
* शुक्रवार की रात को फ़िल्म का समय साढ़े ९ बजे था बस मन में आया कि इसे १० बजे कर दिया जाये तो बस इसे दस बजे कर दिया .
*”ये ज़िंदगी है गुलशन ”धारावाहिक पहले शनिवार व् रविवार की रात को साढ़े ८ बजे आता था किन्तु उससे तो दूरदर्शन ने कुछ ज्यादा ही दुश्मनी निभायी उसे पहले तो मंगलवार व् बुद्धवार को रात ९ बजे का समय दिया और फिर उससे ये समय भी छीन लिया और उसे दूरदर्शन से हटा दिया .
*”बिन बिटिया आँगन सूना ”धारावाहिक दिन में १.०० बजे आता था बस मन में आया कि इसे ख़त्म किया जाये और इसे ख़त्म कर दिया .
और ये ही नहीं ऐसा वह पहले भी करता रहा है और जिस तरह की उसकी कार्यप्रणाली है उसे देखते हुए लगता है कि वह आगे भी अपने इसी रुख पर कायम रहने वाला है क्योंकि उसे न तो दर्शकों की भावनाओं व् रुचि से कोई मतलब है न विज्ञापनों की भरमार से कोई सरोकार क्योंकि अगर ऐसा होता तो दूरदर्शन लोकप्रिय धारावाहिक ”सरस्वती चन्द्र ”के साथ ऐसा कदापि नहीं करता .
१ मार्च से दूरदर्शन ने सरस्वती चन्द्र को शनिवार का समय बढ़ाया किन्तु पिछले १ वर्ष से इसे मिला रात साढ़े ९ बजे का समय छीन लिया जबकि उसके पास न तो उसकी तुलना में विज्ञापन समर्थित कोई अन्य धारावाहिक पहले था और न ही समय बदलने के ९-१० दिन उपरान्त भी कोई अन्य धारावाहिक अभी तक है .

दूरदर्शन को अपनी कार्यप्रणाली में परिवर्तन लाते हुए सरस्वती चन्द्र को उसका पहले वाला स्थान वापस देना होगा अन्यथा दूरदर्शन अब जो नाम मात्र के दर्शक वर्ग से जुड़ा है वह भी उससे टूट जायेंगे क्योंकि आज समय डिश टी.वी. का है और भले ही कितने क़ानून बनाकर उसमे दूरदर्शन को जगह दिलवा दी जाये किन्तु दर्शकों के दिलों में उसकी जगह तभी बन सकती है जब उस पर कुछ स्थायी तो हो .वह चैंनल जो कि दर्शकों की भावनाओं से खेलता हो ,जो दर्शकों की रूचि को कोई महत्व न देता हो उसे दर्शक ही कोई महत्व क्यूँ देंगे ?इसलिए समय रहते ही दूरदर्शन इस तरह के परिवर्तन को हटाकर दर्शकों की पसंद को तरज़ीह दे और सरस्वतीचंद्र को उसका पहले वाला समय दे और आगे से इस सम्बन्ध में मात्र अपनी राय को ऊपर न रखते हुए ”वोटिंग प्रक्रिया या एस.एम्.एस.”प्रक्रिया अपनाये तभी वह आज के प्रतियोगी युग में अपनी स्थिति सुदृढ़ रख सकता है क्योंकि आज सभी जानते हैं कि जनता की इच्छा सर्वोपरि है और जनता ही तो दर्शक वर्ग भी है .
शालिनी कौशिक
[कौशल ]



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1 प्रतिक्रिया

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sanjay kumar garg के द्वारा
March 11, 2014

आप ने सही लिखा है, आदरणीया शालिनी जी!


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