! मेरी अभिव्यक्ति !

तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने, दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी . जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

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बेटे-बेटी में फर्क नहीं कोई

Posted On: 4 Mar, 2014 social issues,कविता,Celebrity Writer में

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Sad beautiful woman looking out the window - stock photo

वह

मर गयी

जलकर

अकेली थी

बीमार थी

बुढ़ापे की ओर बढ़ रही

साठ वर्षीया लाचार थी

और खास बात ये

वो बेटों की माँ थी

बेटे

जिनके व्यस्त जीवन में

माँ की जगह ना थी

पर

वह

ज़िंदा है

लाचार है

बूढी है

पति की दौलत से

बेटी का घर बनाया

और बेटी

ने माँ को

वृद्धाश्रम भिजवाया

आज

जलकर मरती माँ

वृद्धाश्रम में बैठी माँ

देख

समझ में

यही आया

बेटे-बेटी

में नहीं

कोई

अंतर

दोनों ने

ही अलग

किया है

माँ

को

बोझ

समझकर !

…..

शालिनी कौशिक

[कौशल ]




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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Ritu Gupta के द्वारा
March 6, 2014

मार्मिक सुंदर रचना बधाई शालिनी जी

sanjay kumar garg के द्वारा
March 6, 2014

आदरणीया शालिनी जी, सादर नमन! अक्सर देखा जाता है, लड़कियां माता-पिता के प्रति ज्यादा संवेदनशील होती हैं ! दिल को छू लेने वाली रचना के लिए आभार!

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
March 5, 2014

ह्रदय स्पर्शी रचना ,शालिनी जी ,फिर भी बेटी अधिक तर संवेदन शील होतीं हैं ,(अपवादों को छोड़ कर )पराये घर जाकर उसकी कुछ मजबूरियां भी हो जातीं हैं.सादर


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