! मेरी अभिव्यक्ति !

तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने, दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी . जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

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इम्तिहान-ए-तहम्मुल लिए जा रहे हैं ये ,

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Bharatiya Janata PartyNarendra Modi

सरज़मीन नीलाम करा रहे हैं ये ,
सरफ़रोश बन दिखा रहे हैं ये ,
सरसब्ज़ मुल्क के बनने को सरबराह
सरगोशी खुलेआम किये जा रहे हैं ये .
…………………………….
मैकश हैं गफलती में जिए जा रहे हैं ये,
तसल्ली तमाशाइयों से पा रहे हैं ये ,
अवाम के जज़्बात की मजहब से नज़दीकी
जरिया सियासी राह का बना रहे हैं ये .
………………………………………………
ईमान में लेकर फरेब आ रहे हैं ये ,
मजहब को सियासत में रँगे जा रहे हैं ये ,
वक़्त इंतखाब का अब आ रहा करीब
वोटें बनाने हमको चले आ रहे हैं ये .
……………………………………………..
बेइंतहां आज़ादी यहाँ पा रहे हैं ये ,
इज़हारे-ख्यालात किये जा रहे हैं ये ,
ज़मीन अपने पैरों के नीचे खिसक रही
फिकरे मुख़ालिफ़ों पे कसे जा रहे हैं ये .
……………………………………..
फिरकापरस्त ताकतें उकसा रहे हैं ये ,
फिरंगी दुश्मनों से मिले जा रहे हैं ये ,
कुर्बानियां जो दे रहे हैं मुल्क की खातिर
उन्हीं को दाग-ए-मुल्क कहे जा रहे हैं ये .
………………………………………
इम्तिहान-ए-तहम्मुल लिए जा रहे हैं ये ,
तहज़ीब तार-तार किये जा रहे हैं ये ,
खौफ का जरिया बनी हैं इनकी खिदमतें
मर्दानगी कत्लेआम से दिखा रहे हैं ये .
……………………………………..
मज़रूह ज़म्हूरियत किये जा रहे हैं ये ,
मखौल मजहबों का किये जा रहे हैं ये ,
मज़म्मत करे ”शालिनी” अब इनकी खुलेआम
बेख़ौफ़ सबका खून पिए जा रहे हैं ये .
…….
शब्दार्थ-सरबराह-प्रबंधक ,फिकरे-छलभरी बात ,तहम्मुल-सहनशीलता .

शालिनी कौशिक
[कौशल ]



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5 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yamunapathak के द्वारा
March 3, 2014

bahut hee umdaa

Ritu Gupta के द्वारा
March 2, 2014

सिर्फ मोदी ही नही हर नेता आप कि गजल पर फिट बैठता है अच्छी रचना बधाई शालिनी जी

Rajesh Kumar Srivastav के द्वारा
March 1, 2014

करोडो भारतीयों के सपना पूरा करने आ रहे है वो / आ नहीं, बुलाये जा रहे है वो / भय, भूख, भ्रष्टाचार, परिवारवाद, तुष्टिकरण, व्याधियों को मिटाने की जरुरत आन पड़ी है / इसलिए हर-हर मोदी, घर-घर मोदी का- नारा लगा रहे है हम /

sadguruji के द्वारा
March 1, 2014

आदरणीया शालिनीजी,नेताओ की स्तुति की जाये तो भी उन्हें फायदा होता है और उनकी बुराई की जाये तो भी उन्हें फायदा होता है.दोनों ही तरह से उनका प्रचार प्रसार ही तो हो रहा है.आप बहुत अच्छा ग़ज़ल और गीत लिखती हैं.आपकी पारिवारिक और सामाजिक विषयों पर लिखीं रचनाएं अनूठी होती हैं.बधाई और शुभकामनाओ सहित.

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
March 1, 2014

मौज़ू रचना ! बधाई शालिनी जी !!


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