! मेरी अभिव्यक्ति !

तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने, दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी . जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

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हँसे जा रहा है हँसे जा रहा है .

Posted On: 22 Feb, 2014 Others,कविता,Celebrity Writer में

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मृत्यु
का आलिंगन
मनुष्य के लिए
स्वयं करना
है कायरता
जीवन
व्यतीत करना
भले बने मनुज के लिए
एक विवशता
फिर भी
कायर न कहलाये
खून के घूँट पीता
जीये जा रहा है
और ईश्वर
देख अपनी माया की
सफलता
मोह की ज़ंज़ीरों में
उसे बंधा समझ
पालन के कर्त्तव्य में
होकर विफल भी
हँसे जा रहा है
हँसे जा रहा है .

;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;

शालिनी कौशिक
[कौशल ]



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7 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Rajesh Dubey के द्वारा
March 2, 2014

संघर्षों से लड़ना ही तो जीवन है. भावपूर्ण कविता, वधाई.

Ritu Gupta के द्वारा
March 2, 2014

सुंदर सार्थक विचारों से भरपूर कविता आज की पीडी जो जान को कुछ नही समझती क़े लिए सबक देती रचना बधाई शालिनी जी

deepakbijnory के द्वारा
February 28, 2014

सुंदर अभिव्यक्ति गागर में सागर भर दिया आदरणीय शालिनी जी http://deepakbijnory.jagranjunction.com/2014/02/25/वृक्षारोपण-कविता/

sanjay kumar garg के द्वारा
February 24, 2014

वास्तविकता को उजागर करती कविता, आदरणीया शालिनी जी!

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
February 23, 2014

देखन में छोटन लगे घाव करे गम्भीर ! शालिनी जी बधाई !1

Santlal Karun के द्वारा
February 23, 2014

आदरणीया शालिनी जी, इस छोटी-सी कविता के माध्यम से आप ने बड़ा अच्छा तार्किक जीवन-दर्शन दिया है; हार्दिक साधुवाद एवं सद्भावनाएँ !

sanjeevtrivedi के द्वारा
February 23, 2014

बहुत ही सुन्दर कविता कम शब्दों मे बड़ी बात कही है आपने शालिनी जी…


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