! मेरी अभिव्यक्ति !

तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने, दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी . जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

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आभास और संकेत

Posted On: 18 Feb, 2014 social issues,कविता,Celebrity Writer में

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कल्पना
ख्वाब
गफलत
आभास एक नारी मन का !
हकीकत
चेतन
यथार्थ
संकेत एक पुरुष सोच का !
कल्पना कर नारी सजाये सुन्दर घर
ख्वाब देख रखे खुशियों की तमन्ना
गफलत में माने सब अपना .
हकीकत दिखाए जीवन की पुरुष सबको
चेतन अवस्था में ले आये शिथिल मन को
यथार्थ ला उजाड़े ख्वाबों के उपवन को .

शालिनी कौशिक

[woman about man]



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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Pankaj Kumar Mishra Vatsyayan के द्वारा
February 19, 2014

बहुत कुछ कह गयी हैं आप इस अति लघु अभिय्वक्ति के माध्यम से, देखन में छोटा लगे, बात बहुत गम्भीर। एक व्यापक व्याख्या, आपकी इस कविता के द्वारा की जा सकती है और पुरुष तथा प्रकृति को समझाया जा सकता है।


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