! मेरी अभिव्यक्ति !

तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने, दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी . जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

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खिले कमल है कीचड में ही -हाथ से नाल जुडी है .

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आधी बांह का कुरता पहने ,उलटे हाथ घडी है ,
सिर पर पगड़ी पहन सुनहरी ,त्यौरी चढ़ी पड़ी है .
………………………………………………………….
अपने घर को छोड़ के भागे ,बाप का माल हड़पने ,
काम पड़े पर कहे तुनककर ,मेरी नहीं अड़ी है .
……………………………………………………………………
खुद के काम के ढोल बजाये ,और में कमी निकाले ,
अपनी बात की तारीफों की आदत इसे बड़ी है .
………………………………
शीशे के घर में रहकर ये ,मारे कंकड़ पत्थर ,
भूल गया खुद उसकी मूरत ,लाठी लिए खड़ी है .
…………………….
अपने दम आगे बढ़ने की ,हिम्मत नहीं है जिसमे ,
हाथ बांधकर वह हस्ती ही ,करने नक़ल बढ़ी है .
…………………………………..
जिस ताकत ने किया मुल्क का ,नाम जहाँ में ऊँचा ,
उसे मिटाने की सौगंध ले ,थामी हाथ छड़ी है .
………………………………….
ख़तम अगर करने की कुव्वत ,ख़तम करो मक्कारी ,
जो सत्ता की दहलीजों में,दीमक लगी कड़ी है .
………………………………………………………..
खिले कमल है कीचड में ही ,सबने यहाँ है देखा ,
प्रभ चरण छूने को ”शालिनी” हाथ से नाल जुडी है .
……….

शालिनी कौशिक
[कौशल ]



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Ritu Gupta के द्वारा
February 15, 2014

उत्तम कविता |बधाई

dhirchauhan72 के द्वारा
February 11, 2014

अच्छी कविता है ……………………..भगवान आपकी आत्मा को शान्ति दे !


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