! मेरी अभिव्यक्ति !

तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने, दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी . जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

670 Posts

2139 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 12172 postid : 695728

ग़ज़ल-पहेली [contest ]

  • SocialTwist Tell-a-Friend

सियासत से बचो इसकी ,करीब ऐसे दिन आये ,
छुरी घोपे जिन हाथों से ,उन्हीं को जोड़कर आये ,
महारत इसको हासिल है ,क़त्ल में और खुशामद में ,
संभल जाओ वतन वालो ,ये नेता जब नज़र आये .
…………………………………………………
मुशफ़िक़ है मुआ ऐसा ,जल्लाद शरम खाये ,
मुस्कान से ये अपनी ,मुर्दा मुझे कर जाये ,
मौका परस्त ऐसा ,मेराज समझ मुझको ,
मैयत मेरी सजाकर ,मासूम बनकर आये .
………………………………………….
जन्मा ये जिस जमीं पर ,उसपर ही ज़ुल्म ढाये ,
जमहूर के गले लग ,जेबें भी क़तर जाये ,
करता खुशामदें है ,पाने को तख़्त आज ,
पाये जो गद्दी ,गरदनों पे छुरी फेर जाये .
…………………………….
फितरत से है तकसीमी ,तंगदिल ही नज़र आये ,
तजवीज़ ये बड़ों की ,बिल्कुल न समझ पाये ,
कितने ही वार करले ,कितना ही मुंह छुपाले ,
नेता या आम इंसां ,करनी से बच न पाये .
…………………………………
तरक्की की सभी मंज़िल ,हमारा मुल्क चढ़ जाये ,
मगर जिसकी ये मेहनत है ,उसे ये देख न पाये ,
ये चाहे बांटना हमको ,हिन्दू और मुसलमाँ में ,
भले इसकी सियासत से ,लहू का दरिया बह जाये .
………………………………………………
मुझे तो ये सियासत का ही ,बस पुतला नज़र आये ,
काबिल औ नाकाबिल में ,नहीं ये भेद कर पाये ,
डरे क्या ”शालिनी” इससे ,डरी है सारी दुनिया ही ,
कोई भी वीज़ा देने को ,इसे आगे न बढ़ पाये .
…………………..
शब्दार्थ:मुशफ़िक़-कृपालु ,मुआ-निगोड़ा ,मेराज़ -सीढ़ी ,जमहूर-जनसमूह ,तकसीमी-बंटवारे की चाह वाला ,

-शालिनी कौशिक
[कौशल ]



Tags:

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (3 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

2 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

vishalpandit1979 के द्वारा
January 31, 2014

NICE GO AHEAD…………

jlsingh के द्वारा
January 30, 2014

सिंगापुर में दूध मिले – राज्य गुजरात का यूरोप में भिन्डी बिके – राज्य गुजरात का जर्मनी में खा टमाटर – राज्य गुजरात का और हम कितना बताएं – सिवाय अमरीका सभी गुण गाते हैं – राज्य गुजरात का इतने सारे विकास की चर्चाओं को आपने पूरा ही मिट्टी में मिला दिया अब तो कोयल भी कूकती है, उनके इशारों पर या फिर उड़ जाती अपने अपने बसेरे में


topic of the week



latest from jagran