! मेरी अभिव्यक्ति !

तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने, दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी . जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

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ग़ज़ल-बहाने बेटे की सुध ले हिन्द की माना अब डर के .[contest ]

Posted On: 20 Jan, 2014 कविता,Contest,Celebrity Writer में

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तशददुद करने चले हैं ये मुखालिफ पर कमर कस के ,
चलाते तीर ज़हरीले शहद को मुंह में ये भर के .
…………………………………………………………………….
क़त्ल से बेगुनाहों के भरे नापाक जो दामन ,
चुभाना चाह रहे नश्तर वफ़ादारी में चिढ़कर के .
…………………………………..
वतन के कायदे को ही सीखा जो अदब देना ,
दिखा खुद की ये गद्दारी उसे कायर बताकर के .
…………………………………………………………..
मिली है कुदरत से जिसको मुहब्बत इस ज़माने की ,
उसे ये छीनना चाहे महज ऊँगली उठाकर के .
………………………….
सजाकर महफ़िलें अपनी बरसते हैं मुखालिफ पर ,
मर्ज़ सदियों पुराना ये चढ़ा है आज सिर कर के .
………………………………..
नहीं कुछ काम करने को नहीं कुछ बात कहने को ,
हमेशा काँधे दूजे के चलाये गोली चढ़ कर के .
……………………………..
मांगते फिर रहे पैसा मांगते फिर रहे लोहा ,
ख्वाब क्या देंगे ये हमको यूँ खाली हाथ रखकर के .
………………………………….
विदेशी कह किया बाहर जिसे मौका-परस्तों ने ,
बहाने बेटे की सुध ले हिन्द की माना अब डर के .
………………………………….
हिन्द ने झेला मजहब के नाम पर दहशत और दंगा ,
नहीं फिर देगा वो अवसर देखा एक बार देकर के .
………………………..
लगाना तोहमत ही इनकी बनी एक आम फितरत है ,
न दिखता कुर्सी से आगे न उससे पीछे जाकर के .
…………………………………………………….
”शालिनी” मुल्क को अपने ऐसे हाथों में कैसे दे ,
चले जो राज करने को मुखौटे मुख पे धर कर के .
…………….
शालिनी कौशिक
[कौशल]



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5 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
January 26, 2014

अदब के दृष्टिकोण से एक बिलकुल निर्दोष रचना ! शिखा जी बधाई !

ikshit के द्वारा
January 26, 2014

बहुत अच्छी है ये सोच… – इच्छित

सौरभ मिश्र के द्वारा
January 26, 2014

क्षमा चाहूगा परन्तु किसी राजनीतिक विषय पर मै कोई टिप्पणी नही करुगा

dhirchauhan72 के द्वारा
January 22, 2014

……………मैं आपका चित्र देखता हूँ तो अपनी बेटी याद आती है ……उम्र ज्यादा नहीं है आपकी इसीलिये आपके विचारो की आलोचना करने का मन नहीं करता ! लेकिन विचार छोटे बड़े नहीं होते कुछ तो कहना ही चाहिए जबकि आपमें असीम सम्भावनाएं हैं …………. आपने अगर ऊपर ये चित्र न लगाया होता तो एक अच्छा लेखन था !

Bhagwan Babu Shajar के द्वारा
January 21, 2014

ग़ज़ल के हिसाब से इसमें कुछ कमियाँ है … कृप्या इसे सुधार ले .. कोशिश लाजवाब है .. बधाई…


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