! मेरी अभिव्यक्ति !

तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने, दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी . जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

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कविता -जा हाथ तू दुःख का थाम ले -[contest ]

Posted On: 20 Jan, 2014 कविता,Contest,Celebrity Writer में

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दुःख
एक एहसास
एक अमिट एहसास
साये की तरह
सदा देता है साथ
प्रिय नहीं
पर संग
प्रियतम की तरह
पुष्प नहीं
किन्तु सुगंध
महकाती
जीवन को
हर पल
प्रति पल
सिहर जाता
देख इसे
हर सुख
वह सुख
जो
छूमंतर
दुःख की
झलक मात्र
पाकर
जो वचन
ख़ुशी का देकर भी
हाथ छुड़ा होता
गायब
दुःख देख बजे
इसकी घंटी
इस पर भी मानव
रोमांचित
सुख
संग चले
वह जीने को
और
तत्पर
दुःख देख
नयन भिगोने को
पहचान
सके
पहचान ले
सच्चे साथी
को जान ले
फिर मानव
कभी न बहकेगा
जा हाथ तू
दुःख का
थाम ले .

शालिनी कौशिक
[कौशल ]



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

dhirchauhan72 के द्वारा
January 22, 2014

सुन्दर ……..

yamunapathak के द्वारा
January 21, 2014

बहुत सुन्दर सच है सुख दुःख जीवन के दो पहलू हैं. अँधेरा ना हो तो प्रकाश का महत्व कैसे पता चले….


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