! मेरी अभिव्यक्ति !

तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने, दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी . जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

740 Posts

2189 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 12172 postid : 688311

आलोचना -राजनीतिक -सही है राहुल चिड़िया-मोदी शेर [contest ]

  • SocialTwist Tell-a-Friend

मेनका गांधी ”people with animal ”संस्था चलाती हैं स्वाभाविक है कि वे जानवरों के /प्राणियों के विषय में बहुत अच्छी तरह से जानती ही होंगी इसलिए विश्वास किया जा सकता है कि राहुल गांधी चिड़िया व् नरेंद्र मोदी शेर हैं और उनके अनुसार माना भी जा सकता है कि राहुल गांधी का नरेंद्र मोदी से कोई मुकाबला नहीं .सही कहा मेनका जी ने भला शेर व् चिड़िया का क्या मुकाबला .मेनका गांधी भाजपा की सदस्य हैं किन्तु हैं तो कॉंग्रेस से भारत की एकमात्र महिला प्रधानमंत्री रही इंदिरा गांधी जी की पुत्र वधु और कॉंग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी जी की चाची अर्थात मातृ सदृश ,तो कहना तो उन्हें उनके पक्ष में ही था .
अपनी ही पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को शेर कह एक बार फिर उन्होंने भारतीय जनता में डर कायम कर दिया है .शेर आदमखोर होता है सभी जानते हैं और आजकल तो उत्तर प्रदेश व् उत्तराखंड के एक बड़े क्षेत्र में लोग वैसे भी एक आदमखोर बाघिन के हमलों से आक्रांत हैं लोग सोच रहे हैं कि वह हमले कर आदमियों व् औरतों को मार रही है किन्तु वन विभाग के निदेशक का कहना है कि हमले शेर ने किये हैं ऐसे में बार बार नरेंद्र मोदी को शेर कहना उन्हें खतरा साबित करना नहीं है तो क्या है और अगर खतरा नहीं है तो कुत्तों को अपने बिस्तर पर सुलाने वाले मेनका जी स्वयं किसी शेर को अपने बिस्तर पर सुलाकर देखें शायद ऐसा सम्भव नहीं है तो फिर क्यूँ अपने उम्मीदवार की खिलाफत को ये गिरा हुआ हथियार इस्तेमाल कर रही हैं ?
रिश्ते में राहुल गांधी के चाची जी मेनका अपना पुत्र प्रेम नहीं रोक पायी और उन्हें चिड़िया कह गयी जानती हैं कि इस वक्त देश में उसी पार्टी का महत्व है जो धर्मनिरपेक्ष है और ऐसे में वे राहुल गांधी को चिड़िया कहती हैं क्योंकि जानती हैं कि चिड़िया एक परिंदा है और सभी जानते हैं-
”परिंदों में कभी फिरकापरस्ती नहीं होती ,
कभी मंदिर पे जा बैठे ,कभी मस्ज़िद पे जा बैठे .”
सर्व धर्म सम्भाव वाला यह देश आज स्वयं अपने योग्य प्रधानमंत्री का चयन कर सकता है ,जिसके विरोधी भी चाहे अनचाहे जिसकी खूबियां बता रहे हैं उसके बारे में अन्य किसी प्रमाण की ज़रुरत ही क्या रह जाती है और एक घोषित उम्मीदवार होते हुए नरेंद्र मोदी को स्वयं अपने पार्टी सदस्यों द्वारा देश के लिए खतरा बताया जाता है ऐसे में देश के प्रधानमंत्री के सम्बन्ध में कोई संशय रह ही नहीं जाता क्योंकि सब जनते है कि शेर जंगल का राजा होता है और भारत कोई जंगल नहीं बल्कि विभिन्न धर्मों के संगम व् सम्भाव की स्थली है जहाँ एक चिड़िया फिरकापरस्त ताकतों को ठेंगा दिखाती है .
शालिनी कौशिक
[कौशल ]



Tags:

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (3 votes, average: 3.67 out of 5)
Loading ... Loading ...

2 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
January 22, 2014

अच्छा आलेख , वैसे तो जैसे यह देश धर्म निरपेक्ष है वैसे ही एक साहित्यकार होने के नाते मैं दल ( पार्टी ) निरपेक्ष हूँ | पार्टी के वजाय एक अच्छे व्यक्ति में एक अच्छा व्यक्तित्व का होना नितांत अनिवार्य होता है और एक रचनाकार को उसी को अहमियत देनी चाहिए !एकनिष्ठ होने से बेहतर है सर्वनिष्ठ होना | सुचिंतन के लिए शालिनी जी आप को बधाई !

jlsingh के द्वारा
January 18, 2014

लाजवाब तर्क दिया है आपने!


topic of the week



latest from jagran