! मेरी अभिव्यक्ति !

तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने, दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी . जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

685 Posts

2152 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 12172 postid : 684449

कविता – (Poems)-विपदा ज्वर में ये नीम सम ,उल्लास में है शीरीनी सी [contest ]

Posted On: 10 Jan, 2014 कविता,Contest,Celebrity Writer में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Mother And Daughter -mother and daughter baby girl brushing their teeth together...Father and daughter having fun -

नाजुक कोपल ,कोमल गुलाब की पंखुरी सी ,
बुलबुल ,चंचल ,कोयल की मीठी स्वर लहरी सी ,
हर बगिया की हरियाली है ,
हर चेहरे की वह लाली है ,
फूलों से लदी वह डाली है ,
खुशियों की मञ्जूषा ,मंजुल पुष्पों की मंजरी सी .
रखती है ध्यान सभी का वह ,
दिल से हर लेती सारा भय ,
कर देती जीवन आशा मय,
आशुकोपी ,आशुतोषी मन वीणा की वह मोहिनी सी .
अनमोल ये देन है कुदरत की ,
राहत के देती पल ये सखी ,
घर की रौनक है इससे ही ,
जीवन में भरती रंग-तरंग ऐसी अद्भुत अलबेली सी .
नटखट हिरनी सी चपल है ये ,
मासूम शिशु सी भोली ये ,
कभी शिवा कभी लक्ष्मी है ये ,
विपदा ज्वर में ये नीम सम ,उल्लास में है शीरीनी सी .
पिता के कुल की शान है ,
ससुर के घर का मान है ,
माँ धरती की पहचान है ,
बाबुल के ज्ञान से संजोती ससुराल की नसल सुनीति सी .
बेटी ,बहना रूप में मांगे देखभाल और प्यार ,
पत्नी रूप में सहने को हर दुःख है ये तैयार,
माँ के रूप में साथ खड़ी बन रक्षा- दीवार ,
न रूकती कलम कवि की कभी लिखते इस पर ”शालिनी” सी .

शब्दार्थ-मञ्जूषा -पिटारा ,मंजरी -लता ,शीरीनी -मिष्ठान ,नसल-वंश ,सुनीति-अच्छी नीति ,शालिनी-गृह स्वामिनी .

शालिनी कौशिक
[कौशल ]



Tags:

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

1 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

vaidya surenderpal के द्वारा
January 14, 2014

बहुत सुन्दर भावमय प्रस्तुति।


topic of the week



latest from jagran