! मेरी अभिव्यक्ति !

तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने, दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी . जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

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खुलासा अपनी हसरत का ,है भाया कब मुखालिफ को [contest ]

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ज़रा सा मुंह मैंने खोला,लगी बर-बर मुखालिफ को ,
आईना रख दिया आगे ,आ गया गश मुखालिफ को .
…………………………………………………………………..
अभी तक मेरी आवाज़ें ,थी चाहत जिनकी सुनने की ,
गिरी हैं बिजलियाँ उन पर ,कहा जो सच मुखालिफ को .
……………………………………
कभी कहकर के कठपुतली ,कभी मौनी बाबा कहकर ,
उड़ाते हैं मेरी खिल्ली ,याद क्या सब मुखालिफ को .
…………………………..
चुभे हैं मुझको जो नश्तर ,उन्हीं का है असर देखो ,
विवश होकर ज़हर पीकर ,कहा सब कुछ मुखालिफ को .
………………………………………….
ये दिल से चाहे दुनिया में ,ज़ुदा इंसान की राहें ,
खुलासा अपनी हसरत का ,है भाया कब मुखालिफ को .
………………………………………
संभाला मुल्क है हमने ,कभी तन्हा कभी मिलकर ,
भरोसा जिसपर जनता का ,उसी पर शक़ मुखालिफ को .
……………………………
साज़िशी फितरतें रखकर ,लगाएं ज़िंदगी में आग ,
”शालिनी ”भी दहल उठती ,देखकर इस मुखालिफ को .
…………..
शालिनी कौशिक
[कौशल ]



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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Bhagwan Babu Shajar के द्वारा
January 10, 2014

बहुत सुन्दर..

abhishek shukla के द्वारा
January 10, 2014

इन्हे देखकर दो उम्दा पंक्तियाँ याद आती हैं…. ”हमारी खामोशियों को मज़बूरी का नाम मत दो, हम बोल पड़ते हैं तो सिकंदर काँप जाता है..” पर अफ़सोस विश्व के सबसे बड़े अर्थशास्त्री को सबसे निरर्थक पद दिया गया है…ये इस पद पे समय काट रहे हैं.

harirawat के द्वारा
January 7, 2014

अति सुन्दर फ़िल्म दिखादी आपने बिना पैसे खर्च किये ! हकीकत बयां करदी उन शब्दों पर जो असल में उन्हें घोल कर पिलाए गए थे, अब वे खुद बेचैन हैं ये मैंने कैसे कहे ! आप मेरे ब्लॉग में आए, बहुत धन्यवाद प्रतिक्रिया के लिए ! हरेन्द्र

Imam Hussain Quadri के द्वारा
January 7, 2014

बहुत ही खूबसूरत शेर है और आपका आखरी एक शेर बहुत कुछ बयां करता है धन्यवाद

jlsingh के द्वारा
January 7, 2014

चुभे हैं मुझको जो नश्तर ,उन्हीं का है असर देखो , विवश होकर ज़हर पीकर ,कहा सब कुछ मुखालिफ को . क्या लिखती हैं आप! जो मैंने मुंह जरा खोला, हलक भी सूख गयी उनकी, माँ की याद है आई, देखो अब मुखालिफ को. एक प्रयास मेरा भी….

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
January 6, 2014

अच्छी अभिव्यक्ति की ग़ज़ल ! शालिनी जी , बधाई !!


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