! मेरी अभिव्यक्ति !

तू अगर चाहे झुकेगा आसमां भी सामने, दुनिया तेरे आगे झुककर सलाम करेगी . जो आज न पहचान सके तेरी काबिलियत कल उनकी पीढियां तक इस्तेकबाल करेंगी .

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तकलीफ जिंदगी है आराम मौत है .-contest

Posted On: 4 Jan, 2014 कविता,Contest,Celebrity Writer में

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Standing Skeleton warrior Stock Photo



दरिया-ए-जिंदगी की मंजिल मौत है ,

आगाज़-ए-जिंदगी की तकमील मौत है .

………………………………………………………

बाजीगरी इन्सां करे या कर ले बंदगी ,

मुक़र्रर वक़्त पर मौजूद मौत है .

………………………………………………………..

बेवफा है जिंदगी न करना मौहब्बत ,

रफ्ता-रफ्ता ज़हर का अंजाम मौत है .

………………………………………………………

महबूबा बावफ़ा है दिल के सदा करीब ,

बढ़कर गले लगाती मुमताज़ मौत है .

………………………………………………………..

महफूज़ नहीं इन्सां पहलू में जिंदगी के ,

मजरूह करे जिंदगी मरहम मौत है .

………………………………………………………..

करती नहीं है मसखरी न करती तअस्सुब,

मनमौजी जिंदगी का तकब्बुर मौत है .

……………………………………………………….

ताज्जुब है फिर भी इन्सां भागे है इसी से ,

तकलीफ जिंदगी है आराम मौत है .

………………………………………………………..

तक़रीर नहीं सुनती न करती तकाजा ,

न पड़ती तकल्लुफ में तकदीर मौत है .

……………………………………………………………

तजुर्बे ”शालिनी”के करें उससे तज़किरा ,

तख्फीफ गम में लाने की तजवीज़ मौत है .

……………………………………………………………

शालिनी कौशिक

[कौशल]



शब्दार्थ-तकमील-पूर्णता ,मुक़र्रर-निश्चित ,बावफ़ा-वफादार , तअस्सुब-पक्षपात, तज़किरा-चर्चा ,तक़रीर-भाषण ,तकब्बुर-अभिमान ,तकाजा-मांगना ,मुमताज़-विशिष्ट ,मजरूह-घायल

जागरण जंक्शन ब्लॉग्स में ७ जनवरी २०१४ को प्रकाशित

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7 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sanjay kumar garg के द्वारा
January 7, 2014

सुन्दर गजल, बधाई! शालिनी जी!

abhishek shukla के द्वारा
January 7, 2014

खूबसूरत…”.तख्फीफ” का क्या मतलब होता है?

1sm1 के द्वारा
January 7, 2014

वाह बेहतरीन

meenakshi के द्वारा
January 7, 2014

शालिनी कौशिक जी नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं ! पेशे से एडवोकेट होते हुए भी आप इतनी खूबसूरत भाव दर्शा देती हैं कि लोग दांतो टेल अंगुली दबा लें . कैसे निकालती हैं आप इतना समय ? आश्चर्य होता है . पर प्रतिभावानों की शायद कुछ बात ही और होती है . इतनी भावपूर्ण रचना के लिए आपको बहुत-२ बधाई . मीनाक्षी श्रीवास्तव

jlsingh के द्वारा
January 4, 2014

वाह वाह ! बहुत सुन्दर गजल! (या कलाम) मुझे सही सही नहीं मालूम ..पर कठिन शब्दों के अर्थ देकर आपने उर्दू नहीं जानने वालों के लिए समझना आसान कर दिया! उम्दा!

January 4, 2014

वाह वाह मोहतरमा, बङा उम्दा कलाम है आपका


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